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CAA हिंसा के दौरान यूपी पुलिस के एक्शन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, योगी सरकार से मांगा जवाब

यूपी पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में 7 याचिकाएं दाखिल हुई थीं। इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है।

हिंसा के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास करते पुलिसकर्मी। (फाइल फोटो) PTI

बीते दिसंबर माह में संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ यूपी के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा भड़क गई थी। जिसमें 20 से ज्यादा लोग मारे गए थे और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उस मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से जवाब मांगा है। यूपी पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में 7 याचिकाएं दाखिल हुई थीं। इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है।

जुमे की नमाज के बाद भड़की हिंसा ने उत्तर प्रदेश के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया था। उत्तर प्रदेश के संभल, रामपुर, गोरखपुर, बिजनौर, मेरठ, लखनऊ, मऊ समेत कई जगहों पर लोगों की भीड़ सड़कों पर उतर आयी थी। जब पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया तो भीड़ ने पथराव और आगजनी की।

हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले भी छोड़े और कुछ जगहों पर पुलिस को गोलियां भी चलानी पड़ी। हिंसा के दौरान 20 से ज्यादा लोग मारे गए थे, वहीं कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे, जिनमें से कुछ को गोलियां भी लगी थी।

हिंसा के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा था। जिसके बाद योगी सरकार ने हिंसा करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हीं से नुकसान की भरपाई करने को कहा था। हिंसा के बाद पुलिस ने वीडियो फुटेज निकाल-निकाल कर आरोपियों की पहचान की और फिर उनसे हर्जाना वसूला। हालांकि सरकार के इस कदम की विपक्षी पार्टियों ने आलोचना भी की थी।

यूपी पुलिस की जांच में राज्य में भड़की हिंसा में पीएफआई संगठन का नाम सामने आया था। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पीएफआई के कुछ कथित कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की थी। इसके साथ ही यूपी पुलिस ने पीएफआई पर प्रतिबंध भी लगा दिया था। अब प्रवर्तन निदेशालय की जांच में पता चला है कि उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों का केरल के संगठन पीएफआई के साथ आर्थिक लेन-देन था।

आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की धनशोधन रोकथाम कानून के तहत 2018 से जांच कर रहे ईडी ने पता लगाया है कि संसद में पिछले साल कानून पारित होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अनेक बैंक खातों में कम से कम 120 करोड़ रुपये जमा किए गए।

सूत्रों ने ईडी की जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के हवाले से कहा कि शक है और आरोप हैं कि पीएफआई से जुड़े लोगों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सीएए विरोधी प्रदर्शनों को प्रोत्साहित करने के लिए इस पैसे का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि ईडी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ इन निष्कर्षों को साझा किया है।

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