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CAA विरोध में फिरोजाबाद में 6 मौतें, एक बॉडी में भी नहीं मिली बुलेट, पर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने खोल दी पुलिसिया जुल्म की सच्चाई

एसएसपी ने आगे बताया कि हमने सभी छह मृतकों के मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आईपीसी की धार 304 के तहत एफआईआर दर्ज की है। उन्होंने आगे कहा, 'कृपया ध्यान दें कि उस दिन प्रदर्शकारी बहुत ज्यादा आक्रमक हो गए थे, मगर फिर भी पुलिस ने गोली नहीं चलाई।'

caaतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (एक्सप्रेस फोटो)

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में उत्तर प्रदेश में हुए उग्र प्रदर्शनों में सबसे अधिक चूड़ियों और कांच का शहर फिरोजाबाद प्रभावित हुआ। कथित तौर पर पुलिस कार्रवाई में मारे गए 19 लोगों में से अकेले फिरोजाबाद में छह लोगों की जान चली गई। नागरिकता कानून के खिलाफ 20 दिसंबर को हुए प्रदर्शन के चलते शहर में 75 अन्य लोग भी बुरी तरह घायल हुए, जिनमें 18 पुलिसकर्मी शामिल थे। ज्यादातर मामलों में हॉस्पिटल का वर्जन यह है कि जिन लोगों को गोली लगने के चलते हॉस्पिटल लाया गया तब उनके शरीर से कोई गोली नहीं मिली। इनमें से तीन घायलों को दिल्ली के एम्स और सफदरजंग हॉस्पिटल लाया गया, जबकि एक को राजधानी के अपोलो हॉस्पिटल में इलाज के लिए लाया गया।

फिरोजबाद पुलिस का कहना है कि उन्होंने उस दिन एक भी गोली चलाई। छह मौतों में से हर एक के मामले में पुलिस ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्होंने केस दर्ज किया और एसआईटी जांच में जुटी है। फिरोजाबाद स्थित एसएन हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर आरके पाण्डे ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, ‘दो शवों से हमें पता चला कि शरीर में बुलेट घुसी और बाहर निकल गई। मगर एक भी गोली शरीर के अंदर नहीं मिली। तीसरे शव में सिर में चोट का निशान था मगर कोई गोली का निशाान नहीं मिला।’ फिरोजबाद में मारे गए छह में से तीन लोगों का पोस्टमार्टम इसी हॉस्पिटल में हुआ था।

मामले में फिरोजबाद के एसएसपी सचिंद्र पटेल ने बताया, ‘किसी भी शव को पुलिस हॉस्पिटल लेकर नहीं गई। फिरोजाबाद में तीन में से दो पोस्टमार्टम रिपोर्ट हमें मिली हैं, जिनसे पता चला है कि गोली लगी और बाहर निकल गई। हालांकि दिल्ली में हुई तीन शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट हमें नहीं मिली है।’

एसएसपी ने आगे बताया कि हमने सभी छह मृतकों के मामले में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आईपीसी की धार 304 के तहत एफआईआर दर्ज की है। उन्होंने आगे कहा, ‘कृपया ध्यान दें कि उस दिन प्रदर्शकारी बहुत ज्यादा आक्रमक हो गए थे, मगर फिर भी पुलिस ने गोली नहीं चलाई।’

बता दें कि शहर में सभी मौतें नैनी ग्लास गोल चक्कर के आसपास हुईं, जबकि फिरोजाबाद में अधिकांश कांच और चूड़ी के कारखाने हिंदुओं के स्वामित्व वाले हैं, इनमें अधिकांश मजदूर मुस्लिम हैं।

20 दिसंबर को प्रदर्श के दौरान फिरोजबाद के इन छह लोगों की मौत हुईं-

नबी जान (21)
फिरोजबाद दक्षिणी पुलिस के अंतर्गत आने वाले मोहम्मदगंज निवासी नबी जान उरवशी रोड स्थित चूड़ियों के एक कारखाने में काम करते थे, जोकि अपने छह भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। नबी के पिता का आरोप है कि उनके बेटे के सीने में गोली मारी गई। पिता अय्युब के मुताबिक, ‘मेरा बेटा जिस वक्त काम से घर लौट रहा तब उसे गोली मारी गई थी। उसके दोस्त उसे घर लाए और हम एसएन हॉस्पिटल लेकर गए। जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।’

हालांकि एफआईआर में नबी को गोली लगने का कोई जिक्र नहीं है। अय्युब के पिता कहते हैं कि हमने वही लिखा जो पुलिस ने हमसे कहा। पुलिस ने बताया कि मामले में आईपीसी की धारा 304 (गैर इरादातन हत्या) के तहत केस दर्ज किया गया है। सच्चाई का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक जांच की जाएगी।

राशिद (25)
रामगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले कश्मीरी गेट निवासी राशिद अपने छह बहन भाईयों में सबसे बड़े थे। मृतक के पिता नूर मोहम्मद उर्फ कल्लू (55) बताते हैं, ‘राशिद आंशिक रूप से विकलांग था। उसकी दाईं टांग बाईं टांग से थोड़ी छोटी थी। वो एक चूड़ियो के कारखाने में काम कर रोजाना 150-200 रुपए तक कमा लेता था।’ कल्लू के मुताबिक प्रदर्शन वाले दिन राशिद अपनी मजदूरी के पैसे लेने के लिए गया था। वो प्रदर्शकारियों में शामिल नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसके शव को सुबह चार बजे दफनाने के लिए मजबूर किया।

पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 304 के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक ऐसा लगता है कि पत्थरबाजी के चलते सिर चोट लगने की वजह से उसकी मौत हुई।

अरमान (24)
रामगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले रहमत नगर निवासी अरमान स्थानीय वर्कशाप में काम करते थे। उनके चाचा रफीक बताते हैं, ’20 दिसंबर की शाम कुछ पड़ोसियों ने बताया कि अरमान गंभीर रूप से घायल हुआ है और सड़क पर पड़ा हुआ है। हमें उसे तुरंत एसएन हॉस्पिटल लेकर गए। उसका शव अगले दिन सुबह चार बजे घर भेज दिया गया। पुलिस एक मौलाना को अपने साथ ही लाई और हमें उसे तुरंत दफनाने के लिए मजबूर किया। किसी भी सगे संबंधी को बुलाने तक की इजाजत नहीं दी गई।’ करीब छह महीना पहले ही मृतक की मां का निधन हुआ था।

पुलिस के मुताबिक मृतक के परिजनों आईपीसी की धारा 304 के तहत केस दर्ज किया है। फॉरेंसिक जांच के बाद ही मामले की पूरी सच्चाई बाहर आ सकेगी। हॉस्पिटल के सीएमएस पाण्डे कहते हैं कि पोस्टमार्टम में पता चलता है कि गोली शरीर के अंदर घुसी और बाहर निकल गई। मगर शव के अंदर कोई गोली नहीं मिली।

हारून (30)
30 वर्षीय पुश कारोबारी हारून की 26 दिसंबर को दिल्ली के एस्स में मौत हो गई। उनके साले जकीउद्दीन का आरोप है कि वो पचोखरा पशु मेले से भैंस बेचकर लौट रहे थे। जिस वक्त उन्हें गोली लगी वो एक ऑटोरिक्शा में बैठे थे। जकीउद्दीन ने बताया कि हारून परिवार में इकलौते कमाने वाले थे और ऐसे विवादों खुद को दूर रखते थे।

हालांकि एफआईआर में हारून को गोली लगी ऐसा कोई जिक्र नहीं है। इसपर जकीरुद्दीन कहते हैं कि हमने वहीं लिखा जो पुलिस ने हमसे लिखने को कहा। हारून की मेडिकल रिपोर्ट में उन्हें गोली लगने का उल्लेख किया गया है। इंडियन एक्सप्रेस ने एम्स से पुष्टि की कि हारून की गर्दन में गोली लगी थी।

मामले में पुलिस का कहना है कि आईपीसी की धारा 304 के तहत केस दर्ज किया गया है। सभी मामलों की जांच के लिए एसआईटी टीम का गठन किया गया है।

मुकीम कुरैशी (18)
मुकीम कुरैशी की मौत इलाज के दौरान दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में 23 दिसंबर की रात हुई। वह अपने माता-पिता के आठ भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। उसके पिता मुबीन कहते हैं, ‘आजिविका के लिए वो चूड़ियों पर जरी का काम करता था। जब वो काम से घर लौट रहा था उसे पेट में गोली मारी गई। उसे तुरंत एसएन हॉस्पिटल ले जाया गया। इस दौरान जब डॉक्टरों ने उसका इलाज करने में अक्षमता जताई तब हम उसे आगरा लेकर गए, जहां से उसे दिल्ली के सफदरजंग भेज दिया गया।’

मुबीन कहते हैं कि उन्हें अभी तक कोई मेडिकल कागजात नहीं मिले हैं। हमें बताया कि सभी कागजात पुलिस को सौंप दिए गए। हमें सिर्फ शव का पंचनामा दिया गया था।

सफदरजंग हॉस्पिटल में स्थित एक सूत्र ने बताया कि मरीज के शरीर पर बंदूक की गोली का घाव था। हमने नोटिस किया कि गोली उसकी पीठ में लगी और छाती से बाहर निकल गई। मगर एक भी गोली उसके शव में नहीं मिली। सूत्र ने बताया कि मालूम होता है किसी शक्तिशाली हथियार का इस्तेमाल किया गया था।

इस मामले में भी पुलिस ने अन्य मामले जैसी बात कहीं और आईपीसी की धारा 304 के तहत केस दर्ज किया है।

मोहम्मद शाकिफ (45)
रज्जाक के आठ बेटों में से एक शाकिफ भी चूड़ियों के कारखाने में काम करते थे। उनके सिर में चोटी लगी थी और इलाज के लिए एसएन हॉस्पिटल ले जाया गया। इसके बाद उन्हें आगरा के मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। गंभीर हालत होने पर उन्हें दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया, जहां 26 दिसंबर को उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। शाकिफ के छोटे भाई मोहम्मद सय्यद कहते हैं, ‘प्रदर्शन वाले दिन वो काम से घर लौट रहे थे। जिस वक्त उन्हें गोली मारी गई तब एक टिफिन उनके हाथ में था। सफदरजंग हॉस्पिटल ने कोई कागजात नहीं दिए और कहा गया कि ये सिर्फ पुलिस को दिए जाएंगे। भाई हमेशा ऐसे विवादों से खुद को दूर रखते थे।’

अबरार (25)
गंभीर हालत होने पर अबरार को एसएन हॉस्पिटल से दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में ट्रासफर किया गया था। अबरार के भाई मुक्तलिब कहते हैं, ‘जिस वक्त वो काम से घर लौट रहा तब उसे गोली लगी। जब आगरा में उसका इलाज चल रहा था तब पुलिस ने हमने संपर्क किया। हालांकि हमारी पहली प्राथमिकता शिकायत करना नहीं उसका इलाज था। एक बार जब वो ठीक होकर घर आ जाएगा तब हम इस मामले में पूरी कार्रवाई करेंगे।’

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