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CAA को लेकर ऐहतियातन UP के 14 जिलों में इंटरनेट बंद, जुमे की नमाज के बाद अनहोनी की आशंका

इसी बीच, एडीजी (कानून और व्यवस्था) पीवी रामशास्त्री ने जुमे की नमाज से पहले चाक-चौबंद की गई सुरक्षा को लेकर समाचार एजेंसी ANI से कहा था- हमने सूबे के विभिन्न जिलों में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए और स्थानीय लोगों से भी संवाद किया है।

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CAA, NRC और NPR पर देश में मचे बवाल को लेकर ऐहतियातन उत्तर प्रदेश के 14 जिलों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है। इन जिलों में दिल्ली से सटा गाजियाबाद भी है। जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे के हवाले से समाचार एजेंसी PTI-Bhasha ने बताया कि जिले में गुरुवार रात 10 बजे से अगले 24 घंटे के लिए नेट सेवा निलंबित रहेगी। यानी वहां नेट पर शुक्रवार रात 10 बजे तक रोक रहेगी।

ऐसा इस माह दूसरी बार है, जब इंटरनेट सेवा निलंबित की गई है। पांडे के मुताबिक, सभी मोबाइल कंपनियों को सेवा निलंबित रखने के लिए कहा गया है। यह निर्णय सोशल मीडिया पर घृणा को बढ़ाने वाली टिप्पणियों पर रोक लगाने के लिए लिया गया है।

बकौल पांडे, “असामाजिक तत्व इंटरनेट सेवा का फायदा घृणा को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए उठाने में सक्षम नहीं होंगें। हिंसा और आगजनी की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है।”

गाजियाबाद के अलावा शामली, संभल, बिजनौर, अलीगढ़, सीतापुर, आगरा, मथुरा, मेरठ, सहारनपुर और फिरोजाबाद समेत कुछ और जगह भी नेट बंद कर दिया गया है। इंटरनेट बंद करने के पीछे का कारण- शुक्रवार (27 दिसंबर, 2019) को जुमे की नमाज के बाद अनहोनी की आशंका है।

इसी बीच, एडीजी (कानून और व्यवस्था) पीवी रामशास्त्री ने जुमे की नमाज से पहले चाक-चौबंद की गई सुरक्षा को लेकर समाचार एजेंसी ANI से कहा था- हमने सूबे के विभिन्न जिलों में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए और स्थानीय लोगों से भी संवाद किया है। कुछ जिलों में इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गईं हैं और हम सोशल मीडिया पर भी हालात का जायजा ले रहे हैं।

‘सूबे में आतंक राज, कोर्ट की निगरानी में जांच जरूरी’: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को आरोप लगाया कि CAA और NRC के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए उत्तर प्रदेश में ‘‘आतंक का राज’’ है और राज्य में पुलिस की कार्रवाई और हत्याओं के बारे में सच्चाई का पता लगाने के लिए उच्चतम न्यायालय की निगरानी में एसआईटी जांच जरूरी है। उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन ने किसी भी अतिवादी या गलत कार्रवाई से इनकार किया है।

कई मानवाधिकार समूहों से मिलकर बने ‘हम भारत के लोग: नागरिकता संशोधन के खिलाफ राष्ट्रीय कार्रवाई’ की ओर से यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने कहा कि कानून के मुताबिक सरकार राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल ‘संदेहास्पद नागरिकों’ की पहचान करने के लिए कर सकती है और बाद में इसका इस्तेमाल एनआरसी के लिए किया जा सकता है।

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