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CAA, NRC विवाद: शाहीन बाग पहुंचे 2 सीनियर पत्रकारों को नहीं मिली एंट्री तो सोशल मीडिया पर आ रहे ऐसे कमेंट्स

घटना के बाद दीपक चौरसिया सोमवार को फिर से शाहीन बाग पहुंचे लेकिन इस बार वह अकेले नहीं थे बल्कि एक न्यूज चैनल के एडिटर सुधीर चौधरी भी उनके साथ थे।

वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया और सुधीर चौधरी। फोटो: Social Media

संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और नेशनल रजिस्ट्रर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) के खिलाफ दिल्ली स्थित शाहीन बाग में बीते 45 दिनों से प्रदर्शन चल रहा है। इस दौरान मीडियाकर्मी भी प्रदर्शन स्थल पर जाकर वहां प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर रहे हैं। शनिवार को वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया भी प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने पहुंचे तो उनका जमकर विरोध हुआ। इस दौरान उनके से साथ कथित तौर पर हाथा-पाई भी की गई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ।

इस घटना के बाद दीपक चौरसिया सोमवार को फिर से शाहीन बाग पहुंचे लेकिन इस बार वह अकेले नहीं थे बल्कि एक न्यूज चैनल के एडिटर सुधीर चौधरी भी उनके साथ थे। हालांकि इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उन्हें अपने पास नहीं आने दिया। इस दौरान लोगों ने ह्यूमन चेन बनाई औप दोनों के खिलाफ ‘गो बैक’ के नारे लगाए। इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल है। सोशल मीडिया यूजर्स इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

एक यूजर ने कहा ‘आलम यह है कि अब महागठबंधन बनाकर शाहीन बाग प्रदर्शनकारियों को हराने की कोशिश हो रही है।’ एक यूजर कहती हैं ‘शाहीन बाग प्रदर्शन में शामिल महिलाएं सुधीर चौधरी और दीपक चौरसिया के खिलाफ गो बैक के नारे लगा रहीं हैं। यह Modia के खिलाफ एक जबरदस्त तमाचा है।’

बीजेपी के वरिष्ठ नेता शहनवाज हुसैन ने कहा है कि ‘जिस तरह सुधीर चौधरी और दीपक चौरसिया को प्रदर्शनकारियों ने शाहीन बाग में रोका वह अपमानजनक है, मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं। टूकड़े-टूकड़े गैंग का स्वागत और वरिष्ठ पत्रकारों को रोकना यह किस तरह का विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है?’

एक यूजर कहते हैं ‘प्रदर्शनकारियों ने पत्रकारों को आने से रोका। तो क्या अब शाहीन बाग जाने के लिए हमें अलग से वीजा लेने की जरूरत होगी। क्या भारत के बॉर्डर शाहीन बाग पर जाकर खत्म हो रहे हैं? कश्मीर की तरह गो बैक के नारे लगाए जा रहे हैं, बहुत ज्यादा असहिष्णुता है।’

एक यूजर ने कहा ‘क्यों 2 पत्रकार अंदर नहीं जा सकते ? ऐसा कोनसा आंदोलन है की ये पत्रकार से इतना डर लग रहा? आप तो इन्साफ के लिए लड़ रहे हो तो फिर इनकी पत्रकारिता से डर कैसा? जब कोई आपके आंदोलन में आकर रिपोर्टिंग नहीं कर सकता तो ये देश किसी आतंकवादी को अपनी सीमा में कैसे घुसने दे देवे?’

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