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“शाहीन बाग” बना वासेपुर: मुस्लिम महिलाओं का संदेश- मां और मुल्क बदला नहीं जाता

प्रदर्शन में शामिल तबस्सुम खान दावा करती हैं कि उन्होंने भाजपा को वोट दिया। उन्होंने कहा, 'बाबरी मस्जिद का फैसला आया हमने कुछ नहीं कहा। हमने तीन तलाक कानून पर भी एक शब्द तक नहीं कहा। मगर सीएए पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और भेदभावपूर्ण है।'

Author वासेपुर | Published on: January 22, 2020 9:51 AM
प्रदर्शन में ऐसी एक अन्य महिला सुल्ताना नजर आईं, जिनके हाथ में लगे एक प्लेकार्ड में लिखा, ‘जो मोहब्बत लिखी है गीता और कुरआन में, फिर कैसा झगड़ा हिंदू और मुसलमान में।’ (Express photo by Abhishek Angad)

कोयला खदानों से घिरा झारखंड के धनबाद में वासेपुर लंबे समय से गिरोह हिंसा से प्रभावित रहा है। हालांकि पिछले करीब बीस दिनों से इस क्षेत्र की महिलाएं सुर्खियों में बनी हुई हैं। परंपरागत रूप से अपने घरों में ही सीमित रहने वाली महिलाएं दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नागरिक रजिस्टर पंजी (NRC) के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। वासेपुर में ऐसा पहली बार है जब इतनी बड़ी तादाद में महिलाएं किसी प्रदर्शन की मुख्य भूमिका में हैं। मंगलवार (21 जनवरी, 2020) को करीब 500 महिलाएं प्रदर्शन स्थल पर इकट्ठा हुईं। प्रदर्शन में शामिल तबस्सुम खान दावा करती हैं कि उन्होंने भाजपा को वोट दिया। उन्होंने कहा, ‘बाबरी मस्जिद का फैसला आया हमने कुछ नहीं कहा। हमने तीन तलाक कानून पर भी एक शब्द तक नहीं कहा। मगर सीएए पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और भेदभावपूर्ण है।’ खान कहती है कि उनके बच्चों की परीक्षाएं नजदीक हैं मगर वो उन्हें समय नहीं दे पाईं।

प्रदर्शन में ऐसी एक अन्य महिला सुल्ताना नजर आईं, जिनके हाथ में लगे एक प्लेकार्ड में लिखा, ‘जो मोहब्बत लिखी है गीता और कुरआन में, फिर कैसा झगड़ा हिंदू और मुसलमान में।’ सुल्ताना कहती हैं, ‘ये एक्ट दूसरे दर्जे का है और हम पहले दर्जे के। मेरा दिल्ली के शाहीन बाग में जाने का मन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जानना चाहिए कि सीएए गलत है।’

धनबाद में इंटरनेशनल कॉस्मेटिक ब्रांड संग बिजनेस करने वाली सलमा उस्मानी कहती हैं, ‘हम बस शांति से रहना चाहते हैं और सरकार को यह समझने की जरुरत है। मां और मुल्क बदला नहीं जाता।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे अपने पति को समझाना पड़ा कि यही समय है जब महिलाओं को प्रदर्शन के लिए बाहर निकलना होगा।’

उल्लेखनीय है कि सात जनवरी को एक रैली के बाद, पुलिस ने दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने से संबंधित राजद्रोह कानून और इससे संबंधित धाराओं के तहत सात लोगों और लगभग 3,000 अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। घटना के एक दिन बाद पुलिस ने राजद्रोह के आरोपों को हटाने के लिए कोर्ट में एक याचिका दायर की और इसके एक SHO स्तर के अधिकारी को जवाबदेह बनाया।

इस पर उस्मानी कहती हैं, ‘वहां दुश्मनी को बढ़ाने देने वाला कोई तत्व नहीं था। वो शांतिपूर्ण प्रदर्शन था और हमने किसी को उकसाया नहीं था। हमें उम्मीद है कि हेमंत सोरेन सरकार हमारी बात सुनेगी।’ इसी प्रदर्शनकारियों में मौजूद अस्सी वर्षीय बूढ़ी महिला शेहरिन निशा ने कहा कि मेरे पास कोई प्रमाणपत्र नहीं है। कोई घर भी नहीं है। मैं अपने रिश्तेदारों के साथ रहती हूं और मैं एक भारतीय हूं।

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