CAA Beneficiaries in Haryana: हरियाणा में पिछले दो वर्षों के दौरान अफगानिस्तान और पाकिस्तान से आए 355 लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई है। इनमें अधिकांश हिंदू परिवार हैं, जबकि कुछ सिख परिवार भी शामिल हैं। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) 2019 के तहत इन लोगों को भारतीय नागरिकता मिली है, जिससे वर्षों से वीजा और कानूनी प्रक्रियाओं से जूझ रहे परिवारों को बड़ी राहत मिली है। इन परिवारों में एक 56 साल के लाल चंद भी हैं।

अफगानिस्तान से आए लाल चंद आज भी साल 2011 की वह घटना नहीं भूल पाए हैं, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। काबुल के एक व्यस्त बाजार में पुलिस की वर्दी पहने हथियारबंद लोगों ने दिनदहाड़े उनका अपहरण कर लिया और करीब 13 लाख अफगानी मुद्रा से भरा बैग लूट लिया। लाल चंद ने बताया कि इस घटना के बाद उन्होंने अफगानिस्तान छोड़ने का फैसला कर लिया था।

हरियाणा में स्थायी तौर पर बस गए लाल चंद

लाल चंद हरियाणा के फरीदाबाद में रहते हैं, और 2013 में भारत में स्थायी तौर पर बसने के बाद निजी कंपनी में काम करते हैं। उन्होंने अफगानिस्तान में अपने साथ हुई घटना को याद करते हुए कहा, “उन्होंने हमें दिनदहाड़े करीब पांच मिनट तक टोयोटा गाड़ी में बंधक बनाकर रखा और हमारा बैग छीन लिया, जिसमें करीब 13 लाख रुपये अफगानी मुद्रा में थे। उस दिन मैंने अफगानिस्तान छोड़कर भारत जाने का फैसला किया, क्योंकि मुझे एहसास हुआ कि जीवन ही सब कुछ है।

बता दें कि करीब 300 से अधिक लोग पाकिस्तान से आए हैं, जबकि शेष अफगानिस्तान से आए हैं। इनमें से कई परिवार 1990 के दशक में भारत आए थे, जबकि अन्य 2014 तक प्रवास करते रहे। उनकी नागरिकता को अब नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (सीएए) के तहत औपचारिक रूप दिया गया है। यह नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन के बाद हुआ है।

सीएए के तहत हुआ था प्रावधान

सीएए के तहत यह संशोधन किया गया था कि दिसंबर 2014 के पहले तक अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाईयों को त्वरित नागरिकता दी जाएगी। हरियाणा में बसने के बाद इनमें से कई परिवार फल और सब्जियां बेचकर अपनी आजीविका कमाते हैं, जबकि अधिक संसाधन वाले लोग दवाइयों का व्यापार करते हैं। एक अधिकारी का कहना है, “केवल 20 प्रतिशत परिवार ही संसाधन संपन्न हैं, जबकि बाकी लोग फल और सब्जियों की रेहड़ी और टायर पंक्चर की दुकानों जैसे छोटे-मोटे कामों में लगे हुए हैं।”

लाल चंद का परिवार पीढ़ियों से काबुल के पास रहता था लेकिन 1992 में राष्ट्रपति मोहम्मद नजीबुल्लाह की सोवियत समर्थित सरकार के पतन के बाद उन्हें उत्पीड़न और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा था। उसी वर्ष लाल चंद और उनकी पत्नी भारत चले गए, जहां उन्हें एक बेटी हुई। 2007 में, वे भारत से दवाइयाँ आयात करने वाली एक दवा कंपनी में काम करने के लिए काबुल लौट आए। हालाँकि, 2011 के हमले ने उन्हें अफगानिस्तान को हमेशा के लिए छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

घटना के बाद छोड़ दिया पाकिस्तान

लाल चंद ने कहा, “पुलिस की वर्दी पहने, AK-47 राइफल और पिस्तौल लिए हथियारबंद लोगों ने हमारी टोयोटा कार को अपनी कार से टक्कर मारकर बीच सड़क पर रोक दिया। उन्होंने हमें पीटने के बाद हमारा 13 लाख रुपये का बैग छीन लिया, जिसमें अफगान मुद्रा थी। यह पैसा उस कंपनी का था जिसमें मैं काम करता था।” अगले दिन कंपनी ने शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने हमलावरों से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया। लाल चंद ने आगे कहा, “मुझे नहीं लगता कि शिकायत के बावजूद किसी को गिरफ्तार किया गया। इस घटना के बाद, मैंने भारत जाने का फैसला किया।”

कुछ इसी तरह 2011 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत से प्रेम चंद भारत आए थे। अब उनकी उम्र अब 26 साल है। उनका परिवार नौ परिवारों के एक समूह का हिस्सा था, जिसमें कुल मिलाकर लगभग 50 सदस्य थे, जो एक साथ आए थे। वे बताते हैं, “सरकारी नौकरियां नहीं थीं और बदलती परिस्थितियों के बीच हमें अपना भविष्य अंधकारमय लग रहा था। बेहतर भविष्य सुरक्षित करने के लिए ही ये परिवार भारत आए थे।”

नागरिकता की प्रक्रिया को लेकर जताई खुशी

प्रेम चंद ने पाकिस्तान में सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की और फिर भारत में अपनी शिक्षा जारी रखी, अंततः एक निजी कॉलेज से कंप्यूटर एप्लीकेशन में स्नातक (बीसीए) की डिग्री प्राप्त की। उनका परिवार पहले दिल्ली में बसा, फिर हरियाणा चला गया, जहां वे अब एक मंडी में रेहड़ी पर फल और सब्जियां बेचते हैं। उन्होंने बताया, “नागरिकता मिलने से पहले, हमें हर दो साल में अपना वीजा बढ़ाना पड़ता था और समय-समय पर पुलिस सत्यापन करवाना पड़ता था। अब हमें नागरिकता मिल गई है, और हमारे लिए इससे बड़ी कोई बात नहीं है।”

नागरिकता प्राप्त कर चुके कई परिवार अपने अतीत के कारण होने वाली कठिनाइयों के डर से अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते। एक महिला ने अपना नाम गुप्त रखने का अनुरोध किया। वे कहती हैं, “नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया बहुत सुगम थी। सभी औपचारिकताएं लगभग एक ही बार में पूरी हो गईं, जिसमें मेरा ऑनलाइन आवेदन और डाकघर में साक्षात्कार शामिल था।”

हरियाणा में नागरिकता निदेशक ललित जैन, आईएएस के अनुसार,आवेदन ऑनलाइन जमा किए जाते हैं और डाक विभाग नागरिक प्रशासन और केंद्र सरकार के अधिकारियों वाली जिला स्तरीय समिति द्वारा इनकी जांच की जाती है। निदेशक स्तर पर गहन जांच और सुरक्षा एजेंसियों से मंजूरी मिलने के बाद ही अंतिम स्वीकृति दी जाती है।

जिस पुलिस रिपोर्ट ने भेजा था डिटेंशन कैंप, उसी ने 60 साल की महिला को दिलाई भारतीय नागरिकता; जानिए क्या था मामला

करीब 7 साल पहले दीपाली दास को असम में विदेशी मान लिया गया था और उन्हें 2 साल तक डिटेंशन कैंप में रहना पड़ा। बाद में उन्होंने CAA के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया। अब उन्हें आधिकारिक रूप से भारत की नागरिकता का प्रमाण पत्र मिल गया है। दिलचस्प बात यह है कि 60 साल की इस महिला के वकील धर्मानंद देब ने बताया कि उन्होंने एक खास दस्तावेज के आधार पर यह साबित किया कि वह बांग्लादेश की नागरिक हैं। यह दस्तावेज वही रिपोर्ट थी, जिसे पहले असम पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर ने उनके खिलाफ विदेशी होने का मामला दर्ज करने के लिए बनाया था। पढ़िए पूरी खबर…