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बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष का दावा- विदेशी नस्ल की गायें गोमाता नहीं, देसी किस्म की गायों के दूध में सोना

दिलीप घोष ने कहा, 'देशी नस्ल की गायों की एक खास खूबी होती है, इसके दूध में सोना मिला होता है, इसलिए इनके दूध का रंग हल्का पीला होता है। इनमें एक नाड़ी होती है जो धूप की मदद से सोना उत्पन्न करने में मदद करती है।

Author नई दिल्ली | Published on: November 5, 2019 8:22 AM
बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष। (indian express file)

बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। दरअसल, उन्होंने कहा है कि विदेशी नस्ल की गायें गोमाता नहीं हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि देसी ब्रीड की गायों में सोने की मात्रा पाई जाती है, तभी उनका दूध हल्का सुनहरा रंग लिए होता है। कई अंग्रेजी और स्थानीय भाषा के प्रकाशनों ने दिलीप घोष के इस बयान को छापा है।

द टेलिग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल के बर्धमान जिले में घोष और गाभी कल्याण समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बंगाल बीजेपी प्रमुख ने ये बातें कहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, दिलीप घोष ने कहा, ‘देशी नस्ल की गायों की एक खास खूबी होती है, इसके दूध में सोना मिला होता है, इसलिए इनके दूध का रंग हल्का पीला होता है। इनमें एक नाड़ी होती है जो धूप की मदद से सोना उत्पन्न करने में मदद करती है। हमें इन गायों को रखना होगा। विदेश से जो हम गाय की नस्लें लाते हैं, वे गायें नहीं हैं। वे एक प्रकार की जानवर हैं। विदेशी नस्ल की आवाज भी गायों जैसी रंभाने की नहीं होती…इसलिए वे हमारी गोमाता नहीं बल्कि हमारी आंटियां हैं। यह देश के लिए सही नहीं होगा अगर हम इन आंटियों की पूजा करते हैं।’

घोष ने आगे कहा, ‘यह सही नहीं है कि हम अपने भगवानों की पूजा इन विदेशी नस्ल मसलन जर्सी गायों के दूध से करें। हमारे देश के भगवान भी विदेशी चीजों को स्वीकार नहीं करते। लेकिन जो अंग्रेजी में शिक्षित हैं, उन्हें हर विदेशी चीज पसंद है। उन्हें विदेशी पत्नियां चाहिए। उन्हें उजले रंग रूप वाली पत्नियां चाहिए, कई नेताओं ने शादी की है। सारी समस्याओं की जड़ यही है। न केवल विदेशी गायें, बल्कि लोग विदेशी पत्नियां भी ला रहे हैं। वे यहां आ रही हैं और हमारे नेताओं पर बुरा असर डाल रही हैं। उन्हें जेल जाना पड़ रहा है।’

अंग्रेजी वेबसाइट न्यूज 18 ने भी घोष के बर्द्धमान में दिए बयान को प्रकाशित किया है। इसके मुताबिक, उन्होंने यह भी कहा, ‘शिक्षित समाज से ताल्लुक रखने वाले कुछ लोग सड़क किनारे बीफ खाते हैं। गाय क्यों? मैं उन लोगों से कहना चाहता हूं कि वे कुत्ते का मीट भी खाएं। यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। दूसरे जानवरों का भी मीट खाएं। आपको कौन रोक रहा है? लेकिन अपने घर पर खाएं। गाय हमारी माता है और हम गोहत्या को समाज विरोधी कृत्य के तौर पर देखते हैं। कुछ लोग हैं जो घरों पर विदेशी नस्ल के कुत्ते रखते हैं और उनका मल साफ करते हैं। यह महा अपराध है।’

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