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पूर्वांचलियों के गढ़ में जहां नीतीश कुमार ने अमित शाह संग पहली बार किया था मंच साझा, वहां BJP ने बनाया हार का सबसे बड़ा रिकॉर्ड!

बुराड़ी से जेडीयू उम्मीदवार शैलेंद्र कुमार आप के संजीव झा से रिकॉर्ड 88,427 वोटों से हारे। दिल्ली विधानसभा में ये इस बार की सबसे बड़ी हार है।

सीनियर बीजेपी नेता अमित शाह के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः रेणुका पुरी)

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में सरकार बनाने के लिए भाजपा को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। मंगलवार (11 फरवरी, 2020) को आए चुनावी नतीजों में आप ने एक बार फिर एक तरफा जीत हासिल करते हुए 70 में 62 सीटों पर जीत हासिल की। भाजपा आठ सीटें जीत सकी। साल 2015 में आप ने रिकॉर्ड 67 सीटों पर जीत हासिल की थी जबकि भाजपा महज तीन सीटें जीत सकी है। चुनावों में दोनों बार कांग्रेस अपना खाता तक नहीं खोल सकी।

इसी बीच दिल्ली चुनाव परिणामों का विश्लेषण करें तो सीएम केजरीवाल की आप की जीत का अंदाजा महज इसी बात से लगाया जा सकता है कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार और गृह मंत्री अमित शाह भी दर्जनों चुनावी रैलियों के जरीए अपनी छाप नहीं छोड़ सके। अगर बात बुराड़ी सीट की ही करें तो जेडीयू उम्मीदवार शैलेंद्र कुमार आप के संजीव झा से रिकॉर्ड 88,427 वोटों से हारे। दिल्ली विधानसभा में ये इस बार की सबसे बड़ी हार है। खास बात है कि बुराड़ी सीट जीतने में भाजपा और जेडीयू ने कोई कसर नहीं छोड़ी। शैलेंद्र कुमार के समर्थन में सीएम नीतीश कुमार और गृह मंत्री अमित शाह पहली बार मंच साझा किया और एक बड़ी रैली की। मगर केजरीवाल के सामने दोनों नेता जनता को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर सके।

चुनाव आयोग के मुताबिक आप के संजीव झा को 1,39,368 वोट मिले जबकि शैलेंद्र कुमार 50,941 वोट पा सके। आरजेडी ने भी बुराड़ी सीट से अपना उम्मीदवार उतारा, जो महज 2,278 वोट हासिल कर सका। चौंकाने वाली बात है कि यहां से शिवसेना के उम्मीदवार धरमवीर 18,022 वोट पाने में सफल रहे।

आजतक की खबर के मुताबिक बुराड़ी सीट पर आप की जीत और भाजपा गठबंधन की हार की एक बड़ी वजह भी है। दरअसल जनवरी तक इस सीट पर भाजपा की दावेदारी थी, मगर बाद में यह सीट जेडीयू के खाते में चली गई। इससे स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता खासे नाराज हो गए। खबर के मुताबिक जनवरी में भाजपा के गोपाल झा इस सीट से अपनी दावेदारी ठोक रहे थे, मगर आखिरी मौके पर सीट जेडीयू के खाते में चली गई। इससे भाजपा कार्यकर्ताओं में नकारात्मक संदेश गया और जेडीयू को पूरा समर्थन नहीं मिला।

साल 2015 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो तब भाजपा उम्मीदवार रहे गोपाल झा ने आप के संजीव झा को कड़ी टक्कर थी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि बतौर विधायक संजीव झा ने अपने कार्यकाल में बेहतर काम किया। उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनी और काम भी किया। बता दें कि बुराड़ी विधानसभा क्षेत्र को पूर्वांचलियों का गढ़ कहा माना जाता है।

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