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गुजरात में बुलेट ट्रेन का विरोध, 15 गांवों के किसानों ने लिख कर दिए 14 कारण

किसानों की मांग है कि कानूनी तौर पर, जिस जमीन का अधिग्रहण किया जाना है, उसके मार्केट रेट जिलाधिकारी द्वारा किसानों को बताया जाना चाहिए, लेकिन सूरत के जिलाधिकारी ने अभी तक ऐसी कोई घोषणा नहीं की है।

Author Published on: June 19, 2018 9:38 AM
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के जमीन अधिग्रहण के विरोध में उतरे किसान। (image source-Financial express)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी बुलेट ट्रेन योजना मुश्किलों में फंस सकती है। दरअसल बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की कोशिशों को तगड़ा झटका लगा और किसानों ने इसका विरोध शुरु कर दिया है। सोमवार को सूरत के 15 गांवों के करीब 200 किसानों ने जमीन अधिग्रहण के विरुद्ध जिलाधिकारी को एक मेमोरेंडम सौंपा। इस मेमोरेंडम में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए किए जा रहे जमीन अधिग्रहण पर 14 आपत्तियां पेश की गईं हैं। बता दें कि हाल ही में सरकार ने जमीन अधिग्रहण का नोटिस जारी किया है, जिस पर सोमवार को किसान ट्रैक्टर, मोटरबाइक आदि पर सवार होकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए।

इन किसानों के नेता जयेश पटेल ने इकॉनोमिक टाइम्स से बातचीत में कहा कि जमीन अधिग्रहण का नोटिस क्षेत्र में पर्यावरण या सामाजिक प्रभाव के बारे में सोचे बिना जारी किया गया है। किसान नेता के अनुसार, नोटिफिकेशन जारी करने से पहले स्थानीय लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई। किसानों के अनुसार, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 21 गांवों की करीब 110 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिसका लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा है। किसानों की मांग है कि कानूनी तौर पर, जिस जमीन का अधिग्रहण किया जाना है, उसके मार्केट रेट जिलाधिकारी द्वारा किसानों को बताया जाना चाहिए, लेकिन सूरत के जिलाधिकारी ने अभी तक ऐसी कोई घोषणा नहीं की है।

इसके अलावा किसानों का कहना है कि जब सरकार दिल्ली-मुंबई फ्रेट कॉरिडोर के लिए पहले ही काफी जमीन का अधिग्रहण कर चुकी है। साथ ही पश्चिमी रेलवे के पास भी बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट लायक जमीन है तो फिर अब उनकी जमीन का अधिग्रहण क्यों किया जा रहा है? किसानों ने बताया कि उन्हीं की तरह महाराष्ट्र के पालघर के किसान भी इस जमीन अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। यही वजह है कि मोदी सरकार द्वारा बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए गठित की गई नोडल बॉडी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड को महाराष्ट्र के पालघर में भी जमीन अधिग्रहण को लेकर विरोध का सामना करना पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि पालघर में किसानों ने सरकार ने मांग की है कि पहले उनके इलाके में तालाब, एंबुलेंस, सोलर स्ट्रीट लाइट और डॉक्टर आदि की व्यवस्था की जाए, उसके बाद ही वह बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को अपनी रजामंदी देंगे। मोदी सरकार ने जापान के सहयोग से बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को साल 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

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