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इंस्पेक्टर सुबोध कुमार पर बनाया गया था बिसाहड़ा केस के मीट के नमूनों को बदलने का दबाव! आया था स्टिंग

सुबोध कुमार ने बताया था कि घटनास्थल से मिले मीट के नमूने गाय के मीट के थे, जिन्हें डॉक्टरों ने भी 'गाय का मीट' बताया था, लेकिन सरकार की तरफ से इसे 'भैंस का मीट' बताने के लिए दबाव बनाया गया था।

सुबोध कुमार ने एक स्टिंग के दौरान किया था चौंकाने वाला खुलासा। (pti/express photo)

बुलंदशहर हिंसा में मारे गए पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार साल 2015 में दादरी में हुए अखलाक मॉब लिंचिंग केस के प्रथम जांच अधिकारी थे। सुबोध कुमार की मौत के तार अखलाक हत्याकांड की जांच से भी जोड़े जा रहे हैं। सुबोध कुमार के परिजनों ने भी आरोप लगाया है कि अखलाक हत्याकांड के बाद से ही उन्हें धमकियां मिल रहीं थी। अब एक स्टिंग ऑपरेशन सामने आया है, जिसमें इन बातों को बल मिला है। दरअसल सुबोध कुमार की मौत से कुछ महीने पहले कोबरा पोस्ट ने सुबोध कुमार का स्टिंग ऑपरेशन किया था। इस स्टिंग ऑपरेशन में सुबोध कुमार ने खुद ये बात स्वीकार की थी कि दादरी के अखलाक हत्याकांड में उन पर समाजवादी सरकार की तरफ से मीट के नमूने बदलने का दबाव था। दरअसल सुबोध कुमार ने बताया था कि घटनास्थल से मिले मीट के नमूने गाय के मीट के थे, जिन्हें डॉक्टरों ने भी ‘गाय का मीट’ बताया था, लेकिन सरकार की तरफ से इसे ‘भैंस का मीट’ बताने के लिए दबाव बनाया गया था। गौरतलब है कि उस वक्त उत्तर प्रदेश में सपा की अखिलेश यादव सरकार ही सत्ता में थी।

सुबोध कुमार ने स्टिंग ऑपरेशन के दौरान बताया कि उन्होंने इन नमूनों को बदलने से इंकार कर दिया था। जिसके चलते ही जांच शुरु करने के 40 दिन बाद ही उनका तबादला कर दिया गया था। मथुरा के वृन्दावन थाने में तैनाती के दौरान सुबोध कुमार ने कोबरा पोस्ट से बातचीत में यह खुलासा किया। जिस वक्त दादरी वाली घटना घटी थी, उस वक्त वह जारचा कोतवाली के इंचार्ज थे। घटना के तुरंत बाद ही उन्होंने इलाके में सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने से रोकने के लिए ही 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। सुबोध कुमार ने बताया था कि ” घटनास्थल से बरामद मीट के 3 जार बने थे, जिनमें से एक जार थाने मे रखा गया, दूसरा जार डॉक्टर के पास भेजा गया और तीसरा जार जांच के लिए एफएसएल भेजा गया था।” सुबोध कुमार ने ये भी खुलासा किया था कि “डॉक्टर ने अपनी पहली रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की थी कि घटनास्थल से बरामद मांस गाय का था और उन्होंने उसकी एक कॉपी अपने पास होने का भी दावा किया था। लेकिन बाद में सरकार के दबाव में आकर डॉक्टर ने अपनी रिपोर्ट बदल दी। सरकार चाहती थी कि हम भी मीट को भैंस के मीट से बदल दें। लेकिन यदि मैं ऐसा करता तो मैं सबूतों से छेड़छाड़ का आरोपी बनता, इसलिए मैंने मीट के नमूनों में बदलाव करने से इंकार कर दिया।”

बता दें कि बीते 3 दिसंबर को बुलंदशहर के स्याना इलाके में गोवंश मिलने पर हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा के दौरान सुबोध कुमार की हिंसक भीड़ ने हत्या कर दी थी और प्रदर्शनकारियों में से एक युवक सुमित की भी मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने 27 लोगों को नामजद और 50-60 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस हिंसा में हिंदूवादी संगठन के कुछ नेताओं को मुख्य आरोपी बनाया गया है, जिनकी गिरफ्तारी की कोशिशें की जा रही है। बता दें कि साल 2015 में दादरी के बिसाहड़ा गांव में भी अखलाक पर गोहत्या और गाय का मांस खाने के आरोपों में गुस्साई भीड़ ने हमला कर दिया था, जिसमें अखलाक की मौत हो गई थी। फिलहाल पुलिस सुबोध कुमार की हत्या में अखलाक हत्याकांड और बुलंदशहर हिंसा के तार जुड़े होने की जांच भी कर रही है।

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