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Budget सत्र: जामिया और अलीगढ़ यूनि‍वर्सिटी के मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए विपक्ष ने बनाई रणनीति, NDA में सेंध लगाने की कोशिश

विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए राजग सरकार की उन सहयोगी पार्टियों से संपर्क साधने का फैसला किया है, जो पहले संयुक्त मोर्चा का हिस्सा थीं।

नई दिल्ली | Updated: January 25, 2016 7:26 PM
बजट सत्र में सरकार जीएसटी बिल को पास कराना चाहेगी लेकिन दलित छात्र की आत्‍महत्‍या जैसे मुद्दों पर विपक्ष मुखर है।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया मिल्लिया इस्‍लामिया के अल्पसंख्यक दर्जे के मुद्दे पर विपक्ष बजट सत्र के दौरान सरकार को चौतरफा घेरना चाहता है। इस मकसद से विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए राजग सरकार की उन सहयोगी पार्टियों से संपर्क साधने का फैसला किया है, जो पहले संयुक्त मोर्चा का हिस्सा थीं। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, जदयू, राजद, राकांपा, माकपा और आप सांसदों ने शुक्रवार को एक संयुक्त बयान जारी कर एएमयू और जामिया के अल्पसंख्यक दर्जा हटाने के सरकार के कदम की आलोचना की। अगले महीने बजट सत्र शुरू होने के दौरान संसद में इस मुद्दे पर वे वृहद एकता बनाने की कोशिश करेंगे।

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जदयू महासचिव के सी त्यागी ने बताया, ‘हम लोग अकाली दल, तेदेपा, एजीपी, पीडीपी और टीआरएस जैसे कुछ राजग सहयोगियों को साथ लाने की कोशिश करेंगे जो संयुक्त मोर्चा के कार्यकाल के दौरान हमारे साथ थे और ऐसे मुद्दे पर समान विचार रखते हैं।’ त्यागी ने कहा कि बजट सत्र के दौरान यह मुद्दा जोर शोर से उठे, यह सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं ताकि जेएमआई और एएमयू का अल्पसंख्यक दर्जा वापस लेने से सरकार को रोका जाए। जदयू नेता ने कहा कि इस मुद्दे पर रणनीति बनाने के लिए समान विचार रखने वाले सांसदों की बजट सत्र से पहले बैठक होगी। त्यागी ने कहा कि संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने वाली आठ पार्टियों के सांसदों के अलावा इंडियन नेशनल लोकदल ने भी हमें सहयोग करने का फैसला किया है। हम लोग अब राजग के कुछ सहयोगियों तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।

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उन्होंने कहा कि यह मुद्दा ‘बहुत बड़ा’ है और यह जामिया और एएमयू के महज अल्पसंख्यक दर्जे तक ही सीमित नहीं है। इस मुद्दे को हैदराबाद में दलित छात्र की आत्महत्या पर हालिया आक्रोश और राजनीतिक प्रदर्शनों से जोड़ते हुए त्यागी ने कहा कि मुद्दा संस्थानों की स्वायत्ता के बारे में है। उन्होंने कहा, ‘चाहे वह जामिया हो या अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी या फिर दिल्ली विश्वविद्यालय या जेएनयू में कुलपतियों की नियुक्ति का मुद्दा, सरकार ने महज उनकी स्वायत्ता छीनने का रवैया प्रदर्शित किया है।’ जदयू सांसद ने कहा, ‘हैदराबाद की घटना इसका दुखद नतीजा है। हम लोग जी जान से जुटकर ऐसी प्रवृत्ति का विरोध करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘एएमयू और जामिया के मुद्दे पर बजट सत्र के दौरान हम लोग राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात करेंगे और सरकार के इस कदम के खिलाफ हस्ताक्षरों की सूची पेश करेंगे।’

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