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Budget 2019: ‘ब्रीफकेस’ छोड़ लाल कपड़े में बजट ले पहुंचीं निर्मला सीतारमण, CEA बोले- ये भारतीय परंपरा का ‘बही-खाता’

Budget 2019: इससे पहले, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी शाम पांच बजे बजट पेश करने की अतीत की परंपरा को बदला था। उसके बाद से सभी सरकारों में बजट सुबह 11 बजे पेश किया जाता रहा है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शुक्रवार को लाल बैग में बजट दस्तावेज लेकर पहुंचीं, जबकि पूर्व में और वित्त मंत्री ब्रीफकेस में ये दस्तावेज संसद लाते थे। (फोटोः पीटीआई)

Budget 2019: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार (पांच जुलाई, 2019) को 2019-20 का केंद्रीय बजट पेश किया। पुरानी परंपरा छोड़ते हुए देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री बजट के दस्तावेज लाल रंग के कपड़े में लेकर पहुंची थीं। यह चीज परंपरागत ‘बही-खाते’ की याद दिला रही थी, जबकि पूर्व में कई सरकारों में सभी वित्त मंत्री बजट पेश करने के लिए बजट से जुड़े दस्तावेज ब्रीफकेस में लेकर जाते रहे हैं, जो औपनिवेशिक अतीत की याद दिलाता था।

सीतारमण के पास लाल रंग के कपड़े पर राष्ट्रीय चिह्न बना था। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी शाम पांच बजे बजट पेश करने की अतीत की परंपरा को बदला था। उसके बाद से सभी सरकारों में बजट सुबह 11 बजे पेश किया जाता रहा है। बता दें कि परंपरागत भारतीय व्यापारी अपना हिसाब-किताब बही खाते में रखते हैं।

ब्रीफकेस से बही खाते की ओर जाने पर मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम ने बताया कि केंद्र सरकार ‘भारतीय परंपराओं’ का पालन कर रही है। सुब्रमण्यम के मुताबिक, “यह भारतीय परंपरा है। यह हमारी पश्चिमी विचार की गुलामी से हटने की सोच को दिखाता है। यह बजट नहीं है, यह बही खाता है।”

चीफ इकनॉमिक एडवाइजर डॉ.कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः गजेंद्र यादव)

बजट भाषण में विवेकानंद, गांधी व बसवेश्वर का जिक्रः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंग्रेजी में दिए बजट भाषण में बीच-बीच में हिंदी, संस्कृत, उर्दू और तमिल भाषा में कुछ बातें कहीं। उन्होंने इसी के साथ स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और समाज सुधारक कन्नड संत बसवेश्वर की उक्तियों का भी उल्लेख किया। सीतारमण ने भाषण की शुरुआत में चाणक्य नीति का सूत्र ‘कार्य पुरुष कारेण लक्ष्यं संपद्यते’ पढ़ा।

उन्होंने इसका अर्थ बताते हुए कहा कि दृढ़संकल्प के साथ किया गया कार्य पूरा होता है और सरकार इसका पालन करती है। उन्होंने आगे उर्दू शायर मंजूर हाशमी का एक शेर पढ़ते हुए कहा, ‘‘यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट लेकर भी चिराग जलता है।’’ (पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ )

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