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बिहार में रोजगार के लिए हाहाकार! कहीं नियुक्ति पत्र के लिए अभ्यर्थियों का हंगामा तो कहीं BTech पास भर रहे चपरासी का फॉर्म; विपक्ष ने कसा तंज

बिहार में बेरोज़गारी इस कदर हावी है कि यहाँ जिसे इंजीनियर बनना था वो आज चपरासी तक बनने के लिए दर दर की ठोकरें खा रहा हैं। इतना ही नहीं बिहार में एग्जाम पास किये अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र की बजाय पर पुलिस की लाठी मिल रही है। ऐसे अजीबोगरीब मामले के सामने के बाद विपक्षी राजद ने भी सरकार पर जमकर तंज कसा है।

Bihar Unemployment, Keralaबिहार में 15-29 साल के वर्ग में बेरोजगारी दर 30 फीसदी के ऊपर है। (फोटो- AP)

बिहार में बेरोज़गारी इस कदर हावी है कि यहाँ जिसे इंजीनियर बनना था वो आज चपरासी तक बनने के लिए दर दर की ठोकरें खा रहा हैं। इतना ही नहीं बिहार में एग्जाम पास किये अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र की बजाय पर पुलिस की लाठी मिल रही है। ऐसे अजीबोगरीब मामले के सामने के बाद विपक्षी राजद ने भी सरकार पर जमकर तंज कसा है।

राजद नेता तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश कुमार की सरकार बिहार के लिए अभिशाप है। जदयू और बीजेपी ने मिलकर बिहार को बेरोजगार और मजबूर बना दिया है।  इसके अलावा राजद ने अपने ट्विटर हैंडल से लिखा है कि बिहार में बेरोज़गारी का आलम यह है कि यहाँ बीटेक पास अभ्यर्थी भी चपरासी का फॉर्म भर रहे हैं। साथ ही राजद ने पूछा है कि हत्या, अपहरण और आपराधिक घटनाओं के आधार पर क्या बिहार सरकार 19 लाख रोजगार दे पायेगी ?

दरअसल इन दिनों बिहार में 96 चपरासी के पदों के लिए आवेदन मंगाए गए हैं। आवेदकों में बीटेक, ग्रैजुएट और पीजी छात्र तक शामिल हैं। जबकि इन पदों के लिए योग्यता दसवीं पास तक की ही रखी गयी है।  बिहार में बढ़ते बेरोजगारी की वजह से ही उच्च शिक्षा प्राप्त विद्यार्थी भी इन नौकरियों के लिए काफी कोशिश कर रहे हैं।

इतना ही नहीं बिहार में नौकरी की परीक्षा पास किये गए विद्यार्थियों को अपने नियुक्ति पत्र पाने के लिए भी काफी जद्दोजहद करना पद रहा हैं। आज राजधानी पटना में डाटा एंट्री ओपरेटर की परीक्षा पास किये अभ्यर्थियों ने जमकर हंगामा किया। हालाँकि प्रशासन के द्वारा धरना प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को भगा दिया गया। हंगामा कर रहे अभ्यर्थियों का कहना था कि एक साल पहले ही उनका रिजल्ट आ गया था लेकिन अभी तक ज्वाइन करने का कोई लैटर या मैसेज नहीं मिला है।

ज्ञात हो कि बिहार में बेरोज़गारी इस कदर हावी है कि यह पिछले साल हुए चुनाव का प्रमुख मुद्दा था। चुनाव के दौरान जहाँ राजद गठबंधन की तरफ से 10 लाख सरकारी नौकरी का वादा किया गया था तो वहीँ भाजपा ने 19 लाख रोज़गार देने का वादा किया था। लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। बिहार देश के उन प्रमुख राज्यों में शामिल हैं जहाँ बेरोज़गारी अपने चरम पर है।

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