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1995 लखनऊ गेस्ट हाउस कांड में बड़ा उलटफेर, मायावती ने मुलायम सिंह यादव के खिलाफ केस लिया वापस

बीएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्रा ने पुष्टि की है कि मायावती ने 24 साल पुराने गेस्ट हाउस कांड में दर्ज केस वापस ले लिया है। यह मुकदमा तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के खिलाफ दर्ज था।

सपा नेता मुलायम सिंह के साथ बसपा सुप्रीमों मायावती, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के खिलाफ दर्ज केस बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने वापस ले लिया है। कहा जाता है कि इस कांड के बाद ही दोनों राजनीतिक दल एक-दूसरे के कट्टर विरोधी हो गए थे। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने आपसी मतभेदों को भुलाते हुए ऐतिहासिक गठबंधन किया था। यह जानकारी बीएसपी के 2 नेताओं ने गुरुवार (7 नवंबर) को दी।

बीएसपी ने की पुष्टि: इस मामले में एसपी की ओर से अभी कोई कंफर्मेशन नहीं मिला है। बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के चलते महज 5 महीने में ही एसपी-बीएसपी का ऐतिहासिक गठबंधन टूट गया था। वहीं, बीएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्रा ने पुष्टि की है कि मायावती ने 24 साल पुराने गेस्ट हाउस कांड में दर्ज केस वापस ले लिया है। हालांकि, उन्होंने इस मामले में कोई डिटेल नहीं दी।

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गठबंधन के दौरान अखिलेश ने किया था अनुरोध: हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बीएसपी के एक और नेता ने नाम छिपाने की शर्त पर बताया, ‘‘12 जनवरी को एसपी और बीएसपी के बीच ऐतिहासिक गठबंधन हुआ था। उस दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2 जून, 1995 के गेस्ट हाउस कांड में उनके पिता मुलायम सिंह यादव के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने का अनुरोध किया था।’’

मुलायम से मंच साझा करते वक्त माया ने किया था वादा: सूत्रों का दावा है कि मैनपुरी में चुनावी रैली के दौरान मायावती व मुलायम सिंह यादव ने मंच साझा किया था। उस दौरान मायावती ने अखिलेश को आश्वासन दिया था कि वह उनकी रिक्वेस्ट जरूर पूरी करेंगी।

एसपी ने कहा- जानकारी नहीं: एसपी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने बताया, ‘‘मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। शुक्रवार को इसका पता लगाया जाएगा, जिसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।’’ वहीं, बीएसपी के एक अन्य नेता ने बताया कि यह केस सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग था।

1993 में हुआ था एसपी-बीएसपी का गठबंधन: 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद एसपी प्रमुख मुलायम व बीएसपी चीफ कांशीराम ने गठबंधन किया था। ये दोनों पार्टियां 1993 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ मैदान में एक साथ उतरी थीं। उस वक्त इस गठबंधन ने राज्य की कुल 425 सीटों (उस वक्त उत्तराखंड यूपी का हिस्सा था) में से 176 सीटें जीती थीं। साथ ही, कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई थी और मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री बन गए थे।

मतभेद के बाद हुआ था बवाल: बताया जाता है कि दोनों पार्टियों में धीरे-धीरे मतभेद होने लगे थे। उस दौरान बीजेपी नेताओं ने मायावती से मुलाकात करके कहा था कि अगर वह उनके साथ आती हैं तो उन्हें सीएम बनाया जा सकता है।

एसपी नेताओं ने किया था हमला!: 2 जून, 1995 को मायावती ने इस मुद्दे पर बातचीत के लिए लखनऊ के मीराबाई गेस्टहाउस में अपनी पार्टी के विधायकों की मीटिंग बुलाई थी। यह जानकारी मिलते ही एसपी नेता व कार्यकर्ता वहां पहुंच गए थे और कथित तौर पर हमला कर दिया था। कहा जाता है कि मायावती व बीएसपी के कुछ नेताओं ने बचने के लिए खुद को गेस्टहाउस के कमरों में बंद कर लिया था। वहीं, बीजेपी नेताओं ने उन्हें रेस्क्यू किया था। इस मामले में लखनऊ पुलिस थाने में केस दर्ज किया गया था।

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