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राजनैतिक पार्टियों को गुमनामी से मिलने वाले चंदे की सीमा तय करने पर EC का जोर, बसपा को अज्ञात स्रोतों से मिला पूरा चंदा

2004-05 और 2014-15 में बीएसपी ही केवल ऐसी पार्टी थी जिसने घोषणा की थी कि उसे कोई भी चंदा 20 हजार रुपये से ज्यादा का नहीं मिला। इस प्रकार बीएसपी को मिलने वाला 100 फीसदी चंदा अज्ञात जरियों से मिलने वाला बताया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान पार्टी की कुल आय में 2057 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई। 2004-05 में बीएसपी की कुल आय 5.19 करोड़ रुपये थी जोकि 2014-15 में बढ़कर 111.96 करोड़ रुपये हो गई।

बसपा सुप्रीमो मायावती (पीटीआई फाइल फोटो)

राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले अज्ञात नकद चंदे को लेकर एकबार फिर चुनाव आयोग सख्त है और कानून मंत्रालय को यह सुझाव देने जा रहा है कि इस तरह के चंदे की सीमा कितनी रखी जानी चाहिए। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिर चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय से इस बारे में बात करने के लिए कमर कस ली है राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाला अज्ञात नकद चंदा उसने पूरे संग्रह का 20 फीसदी होना चाहिए। ईटी ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि मायावती की नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने अपनी ताजा चंदा मिलने वाली रिपोर्ट दायर की है, जिसमें सभी चंदों को अज्ञात घोषित किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय से होने वाली बात में चुनाव आयोग पार्टियों के चुनावी कैंपेन के खर्च की अधिकतम सीमा लागू करने पर भी सुझाव रखेगा। कहा जा रहा है कि इस कदम का सभी पार्टियों ने समर्थन किया है और वे सभी परिणामों से परिचित हैं। सूत्रों के मुताबिक चुनावों में धन बल की जांच करने के लिए आयोग के एजेंडा में दोनों मुद्दे सबसे ऊपर रहे हैं और 2016 में केंद्र को इनके बारे में बताया जा चुका है।

सूत्रों की मानें तो इस हफ्ते चुनाव आयोग केंद्र को इन मुद्दों को बारे में एकबार फिर से अवगत कराएगा। अज्ञात नकद चंदा मामले पर आयोग की अर्से से नजर बनाए हुए है। 2017 में मोदी सरकार के द्वारा अज्ञात नकद चंदा राशि की सीमा 20 हजार रुपये से 2 हजार रुपये करने की सिफारिश पर सहमति बनी थी लेकिन इससे राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे की अस्पष्टता की समस्या का पूरी तरह से समाधान नहीं हुआ है। सूत्रों के मुताबिक बीएसपी लगातार साल दर साल यह दावा करती रही है कि उसे कोई भी चंदा 20 हजार रुपये से ज्यादा की रकम का नहीं मिला और वह अपने दानदाताओं की घोषणा करने इनकार करती रही है। 2017-18 की अपनी चंदा रिपोर्ट में बीएसपी ने दावा किया है कि उसे नई सीमा के मुताबिक 2 हजार रुपये से ज्यादा का कोई भी चंदा नहीं मिला है। इस बार भी बीएसपी ने अपने दानदाताओं की घोषणा नजरअंदाज की है।

2004-05 और 2014-15 में बीएसपी ही केवल ऐसी पार्टी थी जिसने घोषणा की थी कि उसे कोई भी चंदा 20 हजार रुपये से ज्यादा का नहीं मिला। इस प्रकार बीएसपी को मिलने वाला 100 फीसदी चंदा अज्ञात जरियों से मिलने वाला बताया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान पार्टी की कुल आय में 2057 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई। 2004-05 में बीएसपी की कुल आय 5.19 करोड़ रुपये थी जोकि 2014-15 में बढ़कर 111.96 करोड़ रुपये हो गई। बीएसपी की ताजा चंदा रिपोर्ट पर ध्यान देते हुए चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय को पत्र लिखने का फैसला किया है, जिसमें कहा गया है कि पारदर्शीता सुनिश्चित करने के लिए अज्ञात नकद चंदे का अनुपात 20 करोड़ रुपये या पार्टी के पूरे संग्रह का 20 फीसदी तक सीमित होना चाहिए, जो भी कम हो, लागू किया जाना चाहिए।

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