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राजस्‍थान में पाकिस्‍तान से लगे बॉर्डर के पास बढ़ रही मुस्लिम आबादी, बीएसएफ ने जताई चिंता

बीएसएफ की स्टडी में खुलासा हुआ है कि राजस्थान के पाकिस्तान से लगते बॉर्डर पर मुस्लिम आबादी और कट्टरपंथ तेजी से बढ़ रहे हैं। जिस पर बीएसएफ ने चिंता जाहिर की है।

Author Updated: December 1, 2018 2:43 PM
बीएसएफ की ताजा स्टडी में हुआ खुलासा। (FILE PHOTO)

भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने राजस्थान में पाकिस्तान से लगते बॉर्डर पर मुस्लिम समुदाय की बढ़ती आबादी पर चिंता जाहिर की है। बीएसएफ की ताजा स्टडी में ये चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। जिनके मुताबिक पाकिस्तान सीमा से लगते राजस्थान के जैसलमेर जिले में मुस्लिम आबादी काफी तेजी से बढ़ रही है। साथ ही इस आबादी में कट्टरपंथी रुझान और अरब देशों की संस्कृति का भी खासा प्रभाव बढ़ रहा है। हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों का भी मानना है कि दोनों समुदायों के बीच बातचीत और समन्वय में भी कुछ कमी आयी है। बीएसएफ की स्टडी में पता चला है कि इस इलाके में जनसांख्यिकी बदलाव तेजी से हो रहे हैं और मुस्लिम आबादी करीब 22-25% की तेजी से बढ़ रही है। वहीं इसके अनुपात में अन्य समुदायों की आबादी सिर्फ 8-10% की दर से ही बढ़ रही है। लोगों में धर्म के प्रति रुझान बढ़ा है और बच्चों की मस्जिदों में संख्या बढ़ती जा रही है।

मौलवियों का बढ़ा दखलः टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार स्टडी में पता चला है कि इलाके में मौलवियों का काफी आना-जाना बढ़ गया है। खासकर उत्तर प्रदेश के देवबंद के मौलवी जैसलमेर के पोखरण, मोहनगढ़ आदि इलाकों में लगातार आ जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि मौलवी अपने भाषणों में लोगों को एक अलग धार्मिक पहचान के साथ एकजुट रहने की बात कर रहे हैं। इसके साथ ही मुस्लिम लोग जमीन में भी खूब निवेश कर रहे हैं और हिंदू समुदाय इस पर कड़ी आपत्ति भी जता रहा है। इससे हिंदू और मुस्लिमों के बीच अविश्वास का माहौल भी पनप रहा है। लोगों का मानना है कि मुस्लिम समुदाय की बढ़ती जनसंख्या से इलाके में सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंच रहा है।

राजनैतिक प्रभाव भी बढ़ा रहेः बीएसएफ की स्टडी के अनुसार, जैसलमेर का एक व्यक्ति कई बार पाकिस्तान की यात्रा भी कर रहा है। हालांकि वहां उसके बिजनेस हित हैं, लेकिन वह व्यक्ति जैसलमेर में अपना राजनैतिक प्रभाव भी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ इलाके में हिंदूवादी संगठन भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। स्टडी में एक टास्क फोर्स का गठन करने का सुझाव दिया गया है। इस टास्क फोर्स में पुलिस, प्रशासन, खूफिया विभाग और बीएसएफ के लोगों को शामिल करने की बात कही गई है, जो कि इलाके में बढ़ती सांप्रदायिकता पर नजर रखेगी।

देश-विरोधी प्रभाव के कोई सबूत नहीं: हालांकि बीएसएफ की स्टडी में ये बात भी निकलकर सामने आयी है कि इलाके में देश-विरोधी जैसा कोई प्रभाव नहीं दिखाई दिया है और लोगों में पाकिस्तान के प्रति भी कोई नरमी नहीं देखी गई है। दोनों समुदायों में भी एक दूसरे के प्रति कोई बैर भाव नहीं है और दोनों समुदायों में अच्छे संबंध है। यह रिपोर्ट मोहनगढ़, नाचना, बाहला, भारेवाल, साम, टानोत और पोखरण जैसे इलाकों में सर्वे के आधार पर तैयार की गई है। जब इस रिपोर्ट के मुद्दे पर बीएसएफ चीफ रजनीकांत मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि “यह रिपोर्ट, बॉर्डर इलाकों में आए जनसांख्यिकी, सामाजिक, आर्थिक बदलावों के आधार पर तैयार की जाती है और फिर इसे सहयोगी एजेंसीज के साथ साझा किया जाता है।” फिलहाल यह रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी गई है।

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