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अमित शाह का प्लेन उड़ाने के लिए फर्जीवाड़ा करने का आरोप, कारगिल हीरो BSF पायलट ने उठा लिया यह कदम

सांगवान के खिलाफ मामले की जांच कर रही पुलिस ने बीएसएफ के एयर विंग के कम्प्यूटर विंग का सीसीटीवी फुटेज और नियम-कायदों से जुड़े कागजात मांगे हैं। सांगवान को को-पायलट का भी दर्जा हासिल नहीं है। मेल्स की जांच करने के बाद यह बात सामने आई कि सांगवान ने खुद अपनी सिफारिश की।

गृह मंत्री अमित शाह का प्लेन उड़ाने की योग्यता हासिल करने के लिए सांगवान ने की एलएंडटी कंपनी से की बातचीत। (फाइल फोटो)

कारगिल की जंग के हीरो रिटायर्ड विंग कमांडर जेएस सांगवान ने बीएसएफ के एयर विंग से इस्तीफा देने की पेशकश की है। उन पर आरोप था कि गृह मंत्री अमित शाह का पायलट बनने के लिए उन्होंने अपने सीनियर अधिकारी के नाम से फर्जीवाड़ा किया। हालांकि, उनका इस्तीफा फिलहाल स्वीकार नहीं किया गया है। बीएसएफ का कहना है कि सांगवान की याचिका ‘अंडर प्रोसेस’ है। सूत्रों का कहना है कि अगर सांगवान का इस्तीफा स्वीकार किया गया तो इसका मतलब यह होगा कि उनको बिना किसी जांच का सामना किए जाने देना पड़ेगा।

द इंडियन एक्सप्रेस ने 27 अगस्त को खबर छापी थी कि इंडियन एयरफोर्स में सेवा दे चुके सांगवान बीएसएफ और दिल्ली पुलिस की जांच का सामना कर रहे हैं। उन पर आरोप लगे थे कि वह अमित शाह का प्लेन उड़ाना चाहते थे, जिसके लिए उन्होंने अपने सीनियर अधिकारी के नाम से कम्यूनिकेशन किया। इसके कुछ दिन बाद, सांगवान ने 2 सितंबर को बीएसएफ में सेवाओं से स्वैच्छिक त्यागपत्र देने की अर्जी लगाई। नियमों के मुताबिक, अगर कोई शख्स जांच का सामना कर रहा है तो उसकी रिटायरमेंट या इस्तीफे से जुड़ी याचिका स्वीकार नहीं की जाती है।

वहीं, सांगवान के खिलाफ मामले की जांच कर रही पुलिस ने बीएसएफ के एयर विंग के कम्प्यूटर विंग का सीसीटीवी फुटेज और नियम-कायदों से जुड़े कागजात मांगे हैं। बता दें कि द इंडियन एक्सप्रेस ने खबर छापी थी कि जून और जुलाई में इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र से जुड़ी दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो को बीएसएफ के एयर विंग की ओर से कई ईमेल्स मिले थे। बीएसएफ के एयर विंग के पास ही अमित शाह का प्लेन उड़ाने का जिम्मा है। इन मेल्स में दरख्वास्त की गई थी कि सांगवान को एलएंडटी के प्लेन उड़ाने की इजाजत दी जाए।

इन ईमेल्स में सांगवान की सिफारिश की गई और कहा गया कि वह एक कुशल एम्ब्रेयर प्लेन पायलट हैं। उनके पास 4000 घंटों की उड़ान का अनुभव है। इस सिफारिश के बाद एलएंडटी ने सांगवान को जुलाई में अपनी एक फ्लाइट को उड़ाने की इजाजत दे दी थी। हालांकि, सांगवान के जाने से पहले एलएंडटी ने बीएसएफ के एयरविंग के ऑफिस में कॉल करके कुछ जानकारियां मांगी।

कंपनी को पता चला कि बीएसएफ ने ऐसी कोई सिफारिश ही नहीं की है। यहां तक कि सांगवान को को-पायलट का भी दर्जा हासिल नहीं है। मेल्स की जांच करने के बाद यह बात सामने आई कि सांगवान ने खुद अपनी सिफारिश की। ऐसा करने के लिए उन्होंने अपने सीनियर के नाम का सहारा लिया और भेजे गए ईमेल्स में वेरिफिकेशन कॉल्स के लिए अपना नंबर दे दिया। शुरुआती जांच में सामने आया कि सांगवान शायद अपने उड़ान के घंटे बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे ताकि वह गृह मंत्री का प्लेन उड़ाने की योग्यता हासिल कर सकें। इस मामले में पुलिस के पास मामला दर्ज कराया गया। वहीं, बीएसएफ ने भी आंतरिक जांच शुरू कर दी थी।

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