जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक बार फिर संदिग्ध गतिविधि सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक सीमा क्षेत्र में एक ड्रोन उड़ता हुआ दिखाई दिया, जिसके बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए उस पर फायरिंग की। ड्रोन के दिखाई देते ही पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई और सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।

यह घटना कोई पहली नहीं है। हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर में इस तरह के ड्रोन देखे जाने के मामलों में लगातार इजाफा हुआ है। सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले कठुआ जिले में भी एक ड्रोन की मौजूदगी दर्ज की गई थी। उस दौरान ड्रोन करीब पांच मिनट तक आसमान में नजर आया, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने आसपास के इलाकों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया था, ताकि उसके आने-जाने के रास्ते और उद्देश्य का पता लगाया जा सके।

इससे पहले 15 जनवरी को भी सांबा सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास एक संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की सूचना मिली थी। उस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया था और एहतियाती कदम उठाए गए थे। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

‘उत्तरी सीमा पर हालात स्थिर, निगरानी जरूरी’, ऑपरेशन सिंदूर और LoC पर पाकिस्तानी ड्रोन को लेकर भी सेना प्रमुख ने की बात

ऑपरेशन सिंदूर में करारी शिकस्त के करीब आठ महीने बाद पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर ड्रोन के जरिए उकसावे की कोशिशें तेज होती दिख रही हैं। जनवरी की शुरुआत से ही जम्मू-कश्मीर के कई सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन गतिविधियां दर्ज की गई हैं। भारत की ओर से कड़े संदेश दिए जाने के बावजूद पाकिस्तान की ये हरकतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

सेना के अधिकारियों के अनुसार हालिया घटनाओं में देखे गए ड्रोन आत्मघाती किस्म के नहीं थे। ये छोटे आकार के ड्रोन हैं, जिनका इस्तेमाल मुख्य रूप से निगरानी के लिए किया जा रहा है। आत्मघाती ड्रोन आमतौर पर लक्ष्य की पहचान कर उस पर विस्फोट के साथ हमला करते हैं, लेकिन मौजूदा मामलों में ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।

LOC और अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के आसपास के इलाकों में दिखे संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन, हाई अलर्ट पर सुरक्षा बल

थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आर्मी डे के अवसर पर मीडिया से बातचीत में इन घटनाओं पर विस्तार से जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में जो ड्रोन देखे गए, वे बहुत छोटे थे और कम ऊंचाई पर उड़ रहे थे। इन ड्रोन की लाइटें भी जली हुई थीं, जिससे साफ होता है कि इनका मकसद किसी बड़े हमले को अंजाम देना नहीं, बल्कि भारतीय सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करना था। जनरल द्विवेदी के मुताबिक 15 जनवरी (आर्मी डे) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के आसपास पाकिस्तान को आशंका रहती है कि भारत कोई सख्त कदम उठा सकता है, इसी कारण वह ड्रोन के जरिए हालात को परखने की कोशिश करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को इस तरह की गतिविधियों को लेकर चेतावनी दी जा चुकी है और किसी भी दुस्साहस का कड़ा जवाब दिया जाएगा।

ड्रोन गतिविधियां सिर्फ जम्मू-कश्मीर तक सीमित नहीं हैं। 9 जनवरी से अब तक अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा के अलग-अलग सेक्टरों में करीब 10 से 12 ड्रोन देखे जाने की जानकारी सामने आई है। हाल ही में गुरुवार रात पूंछ और सांबा के रामगढ़ सेक्टर में ड्रोन नजर आए थे। इससे पहले नौशेरा और राजौरी सेक्टर में भी इसी तरह की गतिविधियां दर्ज की गई थीं। इन घटनाओं के बाद सुरक्षाबलों ने एंटी-ड्रोन सिस्टम सक्रिय कर दिए और कई इलाकों में एहतियातन फायरिंग भी की गई।

9 जनवरी को सांबा जिले में एक ड्रोन के जरिए हथियार गिराए जाने की आशंका भी जताई गई थी। तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने दो पिस्तौल, तीन मैगजीन, 16 गोलियां और एक ग्रेनेड बरामद किया था। यह कार्रवाई गणतंत्र दिवस से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने के दौरान हुई थी। इसके अलावा राजस्थान के जैसलमेर इलाके में भी एक संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की सूचना मिली थी, जिसके बाद वहां भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई थीं।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं को देखते हुए साफ है कि सीमा पर तनाव एक बार फिर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि भारतीय सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं और किसी भी तरह की चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं।