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जवानों को हाई क्‍वालिटी खाना मुहैया कराने के लिए BSF ने जारी की नई गाइडलाइंस, गृहमंत्री ने मांगी थी रिपोर्ट

बीएसएफ के महानिदेशक के के शर्मा ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय को स्वयं सैनिकों को मिलने वाले भोजन पर अंतरिम रिपोर्ट सौंपी।

Author नई दिल्ली | January 12, 2017 3:46 PM
बीएसएफ की 29वीं बटालियन के जवान तेज बहादुर यादव ने सेना के अधिकारियों पर राशन बेचने का आरोप लगाया था।

नियंत्रण रेखा पर तैनात एक जवान द्वारा घटिया भोजन के आरोप लगाए जाने के कारण बचाव की मुद्रा में आए सीमा सुरक्षा बल ने सीमा पर तैनात अपने कर्मियों को दिये जाने वाले भोजन की उच्च गुणवत्ता कायम रखने के लिए बुधवार (11 जनवरी) को ताजा दिशानिर्देश जारी किये जबकि केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने जवान के आरोपों पर बल से पूरी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। बीएसएफ के महानिदेशक के के शर्मा ने बुधवार को केन्द्रीय गृह सचिव राजीव महर्षि से मुलाकात की और तेजबहादुर यादव के आरोपों पर एक दूसरी अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। यह आरोप सोशल नेटवर्किंग साइट पर डाले गये वीडियो में लगाए गए हैं।

इस मुलाकात के बाद बीएसएफ प्रमुख ने बाहर प्रतीक्षा कर रहे मीडियाकर्मियों से बातचीत नहीं की। किन्तु शाम को अद्धसैनिक बल ने एक बयान जारी कर सीमा पर तैनात जवानों को उच्च गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराने के लिए छह उपायों की घोषणा की। बयान में कहा गया, ‘जवानों के भोजन से संबंधित मुद्दे, रसद खरीद प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे तथा बाद में उनका दुरुपयोग किसी भी संगठन के लिए चिंता का मुख्य विषय होते हैं।’ इसमें कहा गया, ‘बीएसएफ ने स्थिति पर समग्र दृष्टिकोण अपना है तथा इसके बाद समुचित कार्रवाई शुरू कर दी गयी है।’ वरिष्ठ कमांडिग अधिकारियों के एक दल द्वारा मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा को भी एक उपाय के रूप में गिनाया गया है।

बीएसएफ ने जो अन्य कदम उठाए हैं उनमें वर्तमान व्यवस्था की कमियों का पता लगाना, प्रक्रियागत एवं व्यवस्थागत सुधारों का सुझाव देने, दोहरी जांच के प्रति सतर्कता, जवानों के साथ औपचारिक एवं अनौपचारिक परिसंवाद, तथा सभी मैसों में नकदीरहित लेनदेन सुनिश्चित करने के कदम शामिल हैं। बीएसएफ के महानिदेशक के के शर्मा ने केन्द्रीय गृह मंत्रालय को स्वयं यह अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। उन्होंने गृह सचिव राजीव महर्षि को सूचित किया कि बल के पश्चिमी मोर्चा कमांडर (अतिरिक्त डीजी) तथा एक डाइटीशियन को जम्मू कश्मीर की उस सीमा चौकी पर विस्तृत जांच के लिए भेजा गया जहां जवान तेज बहादुर यादव तैनात था।

इसमें कहा गया कि वीडियो में दिखाई गई दाल डिब्बाबंद खाद्य रसद से निकाली गयी थी तथा ऊंचाई वाले स्थलों के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए यूनिट मैस में परांठा बनाया गया था। इस बीच केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार ने सीमा की प्रत्येक चौकी पर विशेषज्ञों एवं डाइटीशियनों को भेजा है ताकि नियमों के मुताबित जवानों के लिए भोजन गुणवत्ता सुनिश्चत हो सके। अधिकारियों ने बताया कि रिपोर्ट में भोजन बनाने और उसकी स्वच्छ ढंग से आपूर्ति तथा स्थापित नियमों के अनुसार निर्धारित गुणवत्ता को लेकर कुछ कमियां पायी गयी।

अधिकारियों ने कहा कि रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि कि यादव द्वारा वीडियो में दिखाई दाल राजौरी की सीमा चौकी पर भेजे गये डिब्बाबंद भोजन रसद आपूर्ति से डिब्बा खोलकर निकाली गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि इस दाल में मसाले या जीरा नहीं दिखा था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दाल एवं रोटी के नियमित दोपहर एवं रात्रि भोजन के अलावा यूनिट मैस में कुछ अवसरों पर मछली सालन बनता है। यह बात यादव द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में भी देखी जा सकती है।

इस संबंध में अंतिम रिपोर्ट बीएसएफ द्वारा गुरुवार (12 जनवरी) को सौंपे जाने की संभावना है। तब तक मौके पर भेजे गये वरिष्ठ अधिकारी भोजन पकाने के वास्तविक मानक, पद्धति एवं इन क्षेत्रों में जवानों को वितरित किए जाने वाले खाने के वितरण के बारे में जानकारी हासिल कर लेंगे। अधिकारियों ने बताया कि नियंत्रण रेखा की उक्त चौकी पर रसद सेना द्वारा उपलब्ध कराई जाती है और बीएसएफ के संबंधित जवान उसे पकाते हैं। रिपोर्ट में यह जिक्र है कि जवानों को सिर्फ एक ‘पराठा’ नहीं दिया जाता, जैसा कि यादव ने दावा किया है, लेकिन यह अस्पष्ट है कि वह जला हुआ कैसे है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘जांच में पता चलेगा कि रसोईयों ने पराठे खराब और जले हुए बनाए थे, या कोई और मसला था। ऐसी भी संभावना है कि वह ज्यादा देर तक कोयले की आंच पर रह गया होगा।’ इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बहुत ऊंचाई वाले और मुश्किलों वाले इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए अधिकृत खाद्य सामग्री की सूची, खाद्यान्न की उपलब्धता की वास्तविक मात्रा और उक्त मेस सहित अन्य सभी मेस में एक जनवरी से लागू कैलोरी चार्ट भी दी गयी है। इसबीच बल से स्वैच्छिक सेवानिवृति चाहने वाले बीएसएफ जवान की पत्नी और बेटे ने आज उसका बचाव करते हुए कहा कि वह सिर्फ सच्चाई बाहर ला रहे हैं।

यादव की पत्नी ने कहा, ‘उन्होंने जो किया वह गलत नहीं है… उन्होंने सच्चाई दिखायी है… उन्होंने सिर्फ अच्छे खाने और रोटी की मांग की है। यह कहना कि वह मानसिक रूप से बीमार है, सही नहीं है। यदि यह सही है तो उसे सीमा पर क्यों भेजा गया, उसे ड्यूटी पर क्यों तैनात किया गया?’ उसने पूछा, ‘उन्हें ईलाज के लिए क्यों नहीं भेजा गया?’ यादव के बेटे ने कहा, अपने लिए और सीमा पर तैनात सिपाहियों के लिए अच्छा खाना मांगना ‘गलत नहीं है।’ स्कूल जाने वाले इस बच्चे ने कहा, ‘वरना हमें कैसे पता चलेगा कि वहां (सीमावर्ती क्षेत्रों में) क्या हो रहा है और उनके (सिपाहियों) साथ क्या हो रहा है? हमें सिर्फ निष्पक्ष जांच और न्याय चाहते हैं।’

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