दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में लगी आग में गुरुग्राम के एक परिवार के आठ सदस्यों की मौत हो गई। विवेक अग्रवाल के लिए उस होटल में ठहरना उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित हुई।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, आग लगने के तुरंत बाद विवेक ने एक आखिरी फोन कॉल की थी। उन्होंने अपने रिश्तेदार पुनीत गुप्ता को फोन किया था। वह काफी घबराए हुए थे और सिर्फ छह शब्द बोल पाए- भाई, हम शायद बच नहीं पाएंगे।

पुनीत के मुताबिक, यह सुनते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने विवेक को सलाह दी थी कि वह गीला कपड़ा अपने मुंह पर बांध लें ताकि धुआं अंदर न जाए। लेकिन शायद तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

जानकारी के मुताबिक, अग्रवाल के पिता राधेश्याम अग्रवाल पिछले कई दिनों से मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती थे। वह फेफड़ों के गंभीर संक्रमण से जूझ रहे थे। इसी वजह से परिवार के सदस्य उन्हें देखने दिल्ली आए थे। परिवार की सबसे छोटी सदस्य जीविका भी एक दिन पहले ही बेंगलुरु से दिल्ली पहुंची थी। वह अपने दादा से मिलना और उनका हालचाल जानना चाहती थी, लेकिन इस अग्निकांड ने उसे भी नहीं बख्शा।

इस हादसे में विवेक अग्रवाल, उनकी पत्नी तर्जनी अग्रवाल, मां प्रेमलता अग्रवाल, बेटियां जीविका और वरिया समेत परिवार के कुल आठ सदस्यों की मौत हो गई। गुरुग्राम के इस परिवार की आक्समिक मौत ने सभी को अंदर तक झकझोर दिया है। उनके पड़ोसी बता रहे हैं कि विवेक काफी मिलनसार थे, पूरा परिवार काफी हंसता-खेलता था। शुरुआत में तो किसी कॉलोनी निवासी को विश्वास ही नहीं हुआ कि विवेक का परिवार इस अग्निकांड में खत्म हो चुका है, लेकिन जब टीवी स्क्रीन पर मृतकों के नाम आने शुरू हुए, एक खौफनाक डर सच में तब्दील हो चुका था।

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