महिला पहलवानों की ओर से यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने के तीन साल बाद भाजपा के पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के मामले में बरी हो गए। इसके साथ ही पूर्व सांसद का भाजपा के बैनर तले अब पूर्वी यूपी की सक्रिय राजनीति में वापसी का रास्ता भी साफ होने की उम्मीद जताई जा रही है।

मंगलवार को नोएडा में आयोजित एक स्नेह मिलन कार्यक्रम में बृजभूषण और उनके दोनों बेटे प्रतीक भूषण (गोंडा विधायक) और करण भूषण सिंह(कैसरगंज सांसद) की तस्वीर पोस्ट किए गए, जिसमें पोस्टरों पर नारा लिखा था सत्य की जीत हुई।

7 अगस्त को नंदिनी नगर में रैली

बाद में बृजभूषण ने नई दिल्ली से वृंदावन तक लग्जरी गाड़ियों के काफिला भी नजर आया, जिन पर सत्यमेव जयते लिखे हुए स्टिकर चिपकाए गए थे। इसके अलावा, गोंडा जिले के नवाबगंज इलाके में स्थित नंदिनी नगर कैंपस में 7 अगस्त को इसी नाम से एक रैली भी आयोजित की जानी है, माना जा रहा कि इस रैली में पूर्व सांसद अपनी ताकत का प्रदर्शन करेंगे। इसमें पूरे यूपी से समर्थकों के साथ-साथ स्थानीय बीजेपी विधायक और नेताओं को भी बुलाया गया है।

2029 में मिल सकता है टिकट

एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “यौन उत्पीड़न के आरोपों के कारण उन्हें 2024 में उन्हें बीजेपी का टिकट नहीं दिया गया था। अब जब कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है, तो वे कानूनी रूप से बेदाग हैं और 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए अपने बेटे की जगह खुद बीजेपी का टिकट मांग सकते हैं। पार्टी को भी उन्हें दोबारा मैदान में उतारने या कहीं और प्रचार के लिए भेजने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवार चुनते समय पार्टी बृजभूषण की सिफारिशों का भी ध्यान रख सकती है।

2023 में हुआ था प्रदर्शन

बृजभूषण पर लगे आरोपों के कारण हालिया वर्षों में भारतीय खिलाड़ियों का एक बहुत बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था। 2023 में, देश के कुछ शीर्ष पहलवानों ने दिल्ली में महीनों तक विरोध प्रदर्शन किया और उनकी गिरफ्तारी तथा WFI से उन्हें हटाने की मांग की। इनमें ओलंपिक पदक विजेता और विश्व चैंपियनशिप के विजेता भी शामिल थे।

इस विरोध-प्रदर्शन ने पूरे देश का ध्यान खींचा और भाजपा पर लगातार राजनीतिक दबाव बनाया। बाद में, सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद एफआईआर दर्ज होने पर दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

‘जरूर चुनाव लड़ेंगे बृजभूषण’

बृजभूषण के एक करीबी सहयोगी ने कहा कि पूर्व सांसद 2029 के लोकसभा चुनाव में मैदान में उतरेंगे। उन्होंने कहा, “वह निश्चित रूप से 2029 का चुनाव लड़ेंगे। अंतिम फैसला भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को करना है। बरी होने के बाद राजनीतिक रूप से उनकी स्थिति और मजबूत हुई है। भाजपा में सभी का मानना ​​था कि वह बेगुनाह हैं। हम बस कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे थे।”

कई लोकसभा में उनका प्रभाव

भाजपा के एक और वरिष्ठ नेता ने कहा, “कैसरगंज और यूपी के पड़ोसी लोकसभा क्षेत्रों जैसे श्रावस्ती, बस्ती और अयोध्या में उनका काफी प्रभाव बना हुआ है। उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

छह बार सांसद रहे बृजभूषण (पांच बार BJP के टिकट पर और एक बार समाजवादी पार्टी (SP) के टिकट पर जीते) पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं में से एक हैं।

हालांकि, यौन उत्पीड़न के आरोपों के कारण देश भर में आलोचना होने के बाद, भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में कैसरगंज लोकसभा सीट से उनकी जगह उनके छोटे बेटे करण भूषण सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया। करण भूषण सिंह ने अपना पहला चुनाव 1.48 लाख वोटों से जीता। वहीं 2019 में, बृजभूषण ने इसी सीट पर 2.61 लाख वोटों से जीत दर्ज की थी।

उनसे नहीं करवाया पार्टी ने प्रचार

भाजपा ने उनके बेटे को तो मैदान में उतारा, लेकिन बृजभूषण से दूरी बनाए रखी क्योंकि पार्टी को इस बात की चिंता थी कि इन आरोपों से चुनावी नुकसान हो सकता है। इसी कारण उन्हें कैसरगंज के बाहर के निर्वाचन क्षेत्रों में प्रचार के लिए नहीं भेजा गया।

2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान, बृजभूषण ने सिर्फ अपने बेटे के लिए प्रचार किया और बार-बार मतदाताओं से कहा कि वह “संकट” में हैं और करण की जीत उन लोगों के लिए “मुंह पर तमाचा” होगी जो उनके राजनीतिक करियर को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। इतना ही नहीं, करण भूषण के लिए भाजपा के किसी भी बड़े केंद्रीय नेता ने प्रचार नहीं किया।

पार्टी ने बनाकर रखी दूरी

भाजपा सूत्रों ने बताया कि प्रभावशाली नेता होने के बावजूद, उन पर आरोप लगने के बाद से बृजभूषण को पार्टी की संगठनात्मक बैठकों और कार्यक्रमों से काफी हद तक दूर रखा गया।

हालांकि, स्थानीय भाजपा नेताओं ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि बृजभूषण अब सांसद नहीं हैं। पार्टी के एक नेता ने कहा, “उनके दोनों बेटों को इसलिए बुलाया गया था क्योंकि एक सांसद है और दूसरा विधायक।”

एक नेता ने यह भी बताया कि सांसद न रहने के बाद भी स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता अपनी शिकायतें दूर करने के लिए मदद मांगने के लिए बृजभूषण के पास जाते रहे और वे हमेशा उनके लिए उपलब्ध रहे।

2022 के विधानसभा चुनावों और उससे पहले के चुनावों में, बृजभूषण ने पूर्वी यूपी में भाजपा उम्मीदवारों के लिए जोर-शोर से प्रचार किया था।

दिसंबर 2023 में जब उनके करीबी संजय सिंह WFI के अध्यक्ष चुने गए, तो बृजभूषण ने कहा था- “दबदबा तो है, दबदबा तो रहेगा। यह तो भगवान ने दे रखा है।”

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भारतीय कुश्ती के इतिहास के सबसे चर्चित और विवादित मामलों में से एक आखिरकार अपने कानूनी मुकाम पर पहुंच गया। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने तीन अगस्त 2026 को भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह तथा WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को छह महिला पहलवानों की ओर से दायर यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें