BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में आयोजित होने वाले दिन के ब्रिक्स समिट में पहुंच रहे हैं। समिट से पहले ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया की मौजूदा स्थिति और भारत का पक्ष बेबाकी से रखा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में वैश्विक राजनीति और आर्थिक व्यवस्थाएं एक बड़े बदलावों और अस्थिरता से गुजर रही है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट किया कि आज की दुनिया में उतार-चढ़ाव, अनिश्चितता और जटिलता सबसे मुख्य विशेषताएं बन गई हैं। दुनिया भर में हो रहे भू-राजनीतिक संघर्ष, महामारी का असर और मौसम में हो रहे बदलाव वैश्विक अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं।
चुनौतियां और उम्मीद की किरण
विदेश मंत्री ने कहा कि एक तरफ जहां वैश्विक चुनौतियां बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उम्मीद की किरण भी दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि तेजी से होता डिजिटलाइजेशन और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में प्रगति विकास, उत्पादकता और वृद्धि के नए रास्ते खोल रही है।
एस जयशंकर ने कहा है कि बदलते वैश्विक माहौल ने एक ऐसा आर्थिक परिदृश्य तैयार कर दिया है, जहां जोखिम और अवसर दोनों ही हर जगह फैले हुए हैं। ऐसे समय में परिस्थितियों का पहले से अनुमान लगाना, उनके अनुसार खुद को ढालना और सही समय पर प्रतिक्रिया देना सबसे महत्वपूर्ण हो गया है।
कारोबारियों के लिए रास्ते आसान बनाना मुख्य मकसद
BRICS बिजनेस फोरम के महत्व का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य हमारे देशों के व्यवसायों के लिए नए साझेदार तलाशना है। इससे बाजारों तक पहुंच आसान होगी, सप्लाई नेटवर्क जुड़ेंगे और एक-दूसरे की ताकतों का व्यावसायिक लाभ उठाया जा सकेगा।
एस जयशंकर ने कहा कि BRICS देशों के लिए अधिक आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा का सीधा मतलब अधिक ‘आत्मनिर्भरता’ है। इसका लक्ष्य बाहरी झटकों को सहने की क्षमता को मजबूत करना है, ताकि दुनिया से जुड़े रहने के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा में भी आगे रहा जा सके।
उन्होंने कहा किएक मजबूत आर्थिक माहौल तैयार करने के लिए निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं, भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स और पारदर्शी निवेश की जरूरत पर बल दिया गया। इसके अलावा, ऊर्जा संकट से निपटने के लिए ऐसे सिस्टम की आवश्यकता है जो झटकों को सह सकें और हर देश की जरूरतों के हिसाब से ढल सकें।
क्या है BRICS बिजनेस फोरम?
BRICS बिजनेस फोरम निजी क्षेत्र (प्राइवेट सेक्टर) को एक मंच पर लाने का सबसे प्रमुख जरिया है। इसका आयोजन हर साल वही देश करता है जो BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा होता है। यह नेताओं की मुख्य बैठक से ठीक पहले आयोजित किया जाता है।
इस फोरम में प्रमुख कारोबारी, सरकारी मंत्री और राष्ट्राध्यक्ष एक साथ आकर व्यापार, निवेश, वित्त, प्रौद्योगिकी और सतत विकास जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं। यह मंच BRICS के आर्थिक एजेंडे को दिशा देने में सीधे तौर पर योगदान देता है।
शिखर सम्मेलन के फैसलों को मिलती है दिशा
बिजनेस फोरम और BRICS बिजनेस काउंसिल की सिफारिशें अक्सर शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र का हिस्सा बनती हैं। इससे BRICS देशों के बीच व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, छोटे उद्योगों (MSMEs) और सप्लाई चेन को एकीकृत करने में मदद मिलती है।
12 सितंबर से शुरू हो रहा है मुख्य सम्मेलन
BRICS शिखर सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम 12 सितंबर से शुरू हो रहा है। इसमें सदस्य देशों के शीर्ष नेता भारत की अध्यक्षता में शुरू की गई पहलों और BRICS की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा करेंगे।
इस बार सम्मेलन में मजबूत ग्लोबल सप्लाई चेन, सीमा पार भुगतान प्रणाली, राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही न्यू डेवलपमेंट बैंक के विस्तार और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार पर भी चर्चा होगी।
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दिल्ली में अयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रमुख और उनके प्रतिनिधिमंडल शामिल होने आ रहे हैं। इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। इस दौरान शुक्रवार से राजधानी की 35 से अधिक सड़कों पर कुछ देर के लिए यातायात बाधित रहेगा। ड्रोन के उड़ान पर भी पूरी तरह से पाबंदी रहेगी। साथ ही 11 सितंबर को सभी स्कूल और सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे। सम्मेलन को देखते हुए उपराज्यपाल ने 11 सितंबर को सार्वजनिक अवकाश की घोषणा भी की हुई है। पढ़िए पूरी खबर…
