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BRICS में पूरी नहीं हो सकी PM मोदी की मंशा, जैश-लश्कर को घोषणा पत्र में शामिल करने पर देशों के बीच नहीं बनी सहमति

गोवा में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि आतंक को जन्म देने वाला देश भारत का पड़ोसी है और इसे ब्रिक्स के आर्थिक वृद्धि और विकास के उद्देश्यों को खतरा करार दिया।

Narendra Modi Vladimir Putin, Modi Putin Terrorism, Modi Meet Putin, Narendra Modi Vladimir Putin Statement, Narendra Modi Vladimir Putin News, Modi Putin newsबेनालिम (गोवा) में 17वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के मध्य विभिन्न समझौतों पर सहमति के अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (बाएं)। (Sputnik/Kremlin/Konstantin Zavrazhin via REUTERS/15 oct, 2016)

गोवा में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि आतंक को जन्म देने वाला देश भारत का पड़ोसी है और इसे ब्रिक्स के आर्थिक वृद्धि और विकास के उद्देश्यों को खतरा करार दिया। पीएम मोदी ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वाले भी उतने ही खतरनाक है जितने कि आतंकी। इसके बावजूद भी पांचों सदस्य देशों द्वारा स्वीकृत गोवा घोषणापत्र में भारत के उन चिंताओं को जिक्र नहीं किया गया है जो भारत द्वारा उठाई गई थी। घोषणापत्र में आतंकवाद के ठिकानों को खत्म करने का आग्रह किया गया है। साथ ही कहा गया है कि देशों को व्यापक पहल करनी होगी, जिसमें कट्टरपंथ से निपटना, आतंकियों की भर्ती रोकना तथा आतंकवाद की फंडिंग रोकना भी शामिल है। यही नहीं इंटरनेट व सोशल मीडिया पर भी आतंकवाद से टक्कर लेनी होगी।

ब्रिक्स समिट के खत्म होने के बाद सेक्रेटरी अमर सिन्हा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान बेस्ड संगठनों को घोषणा पत्र में शामिल करने को लेकर आम सहमति नहीं बन पाई है क्योंकि यह सिर्फ भारत और पाकिस्तान से जुड़ा मुद्दा हो जाता। ब्रिक्स देशों के घोषणा पत्र में अंतर्राष्ट्रीय आतंकी संगठनों इस्लामिक स्टेट (ISIS), अलकायदा और जुभत-उल-नुसरा जैसे संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का जिक्र किया गया है।

वीडियो: ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी ने पाकिस्तान को बताया आतंकवाद की जन्मभूमि

गौरतलब है कि ब्रिक्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा था, ‘हमारी आर्थिक खुशहाली के लिए प्रत्यक्ष खतरा आतंकवाद से है, त्रासदपूर्ण है कि यह ऐसे देश से हो रहा है जो भारत के पड़ोस में है।’ ब्रिक्स देशों के शांति, सुधार, तार्किक एवं उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई के लिए एकजुट होने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा, ‘अगर प्रगति के नए वाहकों को जड़े जमानी हैं तो सीमाओं के पार कुशल प्रतिभा, विचारों, प्रौद्योगिकी और पूंजी का निर्बाध प्रवाह होना होगा।’ हमने मौजूदा ढांचे को मजबूत बनाने के लिए नये वैश्विक संस्थानों का निर्माण किया है।

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वहीं, ब्रिक्स समिट में शामिल हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम मोदी के बीच भी आतंकवाद के मुद्दे को लेकर बातचीत हुई। खबरों के मुताबिक, मोदी ने शी जिनपिंग को साफ किया कि आंतक के मुद्दे पर दो देशों को अलग सोच नहीं रखनी चाहिए और चीन को आतंक पर अपना स्टेंड क्लीयर करना चाहिए। मोदी और शी इस बात पर तो एकमत थे कि आतंकवाद एक बड़ी समस्या है। शी जिनपिंग ने यह भी कहा कि चीन हर तरीके के आतंकवाद के खिलाफ है। लेकिन जब मौलाना मसूद अजहर का जिक्र आया तो शी जिनपिंग ने कुछ नहीं कहा। चीन की तरफ से इस बात को लेकर भी कोई इशारा नहीं दिया गया कि वह मौलाना मसूद अजहर का बचाव करना बंद करेंगे।

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