बिहार लोक सेवा आयोग ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन कर रहे नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों की प्रमुख मांगों को खारिज कर दिया और साफ किया कि इसके ऑब्जेक्टिव एग्जाम से नेगेटिव मार्किंग नहीं हटाई जाएगी और इसके बाद इसके सभी एग्जाम कम से कम दो चरणों में होंगे।
हालांकि, आयोग के स्पष्टीकरण पर उसके परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह की टिप्पणी का साया पड़ गया, जिन्होंने विरोध प्रदर्शनों के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए हिंदी कहावत, “हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंकते हजार” का हवाला दिया।
परीक्षा नियंत्रक की टिप्पणी से मच गया हंगामा
इस कहावत से सोशल मीडिया और राजनीतिक हंगामा मच गया है। आलोचकों ने आरोप लगाया कि यह विरोध करने वाले छात्रों को कुत्ते की तरह कहने जैसा है। आरजेडी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इस टिप्पणी को शर्मनाक बताया और कहा कि अधिकारियों की ओर से इस तरह की भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बाद में सिंह ने कहा कि कहावत को गलत संदर्भ में उद्धृत किया गया था। उन्होंने एक वीडियो बयान में कहा, “मेरे द्वारा उद्धृत एक कहावत को तोड़-मरोड़ कर सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है। मेरा किसी भी व्यक्ति या समूह की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।” उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति या समूह को ठेस पहुंची हो मैं खेद व्यक्त करता हूं।
यह पूरा विवाद ऐसे वक्त में सामने आया है जब पटना के गर्दनीबाग में छात्र 18 अगस्त से टीआरई-4 के प्रस्तावित परीक्षा पैटर्न सहित कई मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच, ऑल पीएचडी होल्डर्स एंड रिसर्च एसोसिएशन के बैनर तले विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने बिहार के राज्यपाल के साथ अपनी प्रमुख मांगों पर हुए समझौते के बाद 21 दिनों की भूख हड़ताल वापस लेने का आश्वासन दिया है।
राज्यपाल से प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात
राज्यपाल और विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के बीच दो घंटे की बैठक के बाद यह आश्वासन दिया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने विरोध प्रदर्शन कर रहे पीएचडी छात्रों को आश्वासन दिया है कि 2026 के सहायक प्रोफेसर भर्ती नियमों से संबंधित उनकी प्रमुख मांगों पर विचार किया जाएगा और आवश्यक संशोधन होने तक नियमों को स्थगित रखा जाएगा।
छात्रों की मांगों की जांच के लिए 15 दिनों के भीतर शिक्षाविदों और अनुभवी प्रशासकों की एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें आयु सीमा में परिवर्तन, भर्ती परीक्षा, एपीआई/पीएचडी/नेट-जेआरएफ वेटेज और गेस्ट असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवा शर्तों से संबंधित मांगें शामिल हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंह ने कहा कि बीपीएससी परीक्षाएं दो चरणों में आयोजित करने का फैसला पहले ही लिया जा चुका है, प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा। सिंह ने कहा कि यह सिस्टम केवल बिहार तक ही सीमित नहीं है और उन्होंने यूपीएससी, यूपीपीएससी, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां भी लोक सेवा परीक्षाएं दो या तीन चरणों में आयोजित की जाती हैं।
एग्जाम में नैगेटिव मार्किंग होगी
सिंह ने कहा कि बीपीएससी की ओर से आयोजित सभी एग्जाम में नैगेटिव मार्किंग होगी। उन्होंने तर्क दिया कि यह प्रावधान सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होता है। उन्होंने कहा कि इसे हटाने से उम्मीदवार अनुमान लगाकर उत्तर देने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं, जिससे कम तैयारी वाले उम्मीदवारों को फायदा हो सकता है।
सिंह ने हिंदी मीडियम के उम्मीदवारों के खिलाफ भेदभाव के आरोपों को भी खारिज कर दिया और कहा कि परीक्षकों ने उत्तरों का मूल्यांकन उनकी गुणवत्ता के आधार पर किया, न कि भाषा के आधार पर। आयोग ने इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि 60% से अधिक अंक नहीं दिए जा सकते, यह कहते हुए कि ऐसा कोई प्रतिबंध लागू नहीं है।
आयोग ने 70वीं बीपीएससी मुख्य परीक्षा में तीसरी रैंक पाने वाले उम्मीदवार की आंसर शीट को लेकर लगे आरोपों का खंडन करने की भी कोशिश की। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक कॉपी को लेकर सवाल उठाए गए थे, जिसमें आंसर शीट काफी हद तक खाली दिख रही थी और आरोप लगाया गया था कि उम्मीदवार को फायदा पहुंचाने के लिए मूल्यांकन प्रक्रिया में हेरफेर की गई थी। बीपीएससी ने वायरल कॉपी को पूरी तरह से फर्जी बताया और सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में असली आंसर शीट दिखाई।
सिंह ने कहा कि उम्मीदवार ने प्रश्न 7 का उत्तर तो दिया था, लेकिन उसके उप-भागों का उत्तर नहीं दिया था, जिसके लिए कोई अंक नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन भरे गए पन्नों की संख्या के बजाय उत्तरों की गुणवत्ता के आधार पर किया गया था। सिंह ने कहा कि जिन उम्मीदवारों को लगता है कि गड़बड़ी के सबूत हैं, वे अपने दावों के साथ अदालत जा सकते हैं।
इस बीच, टीआरई-4 के लिए बीपीएससी ने कहा कि आवेदन 1 सितंबर से 30 सितंबर तक स्वीकार किए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा दिसंबर या जनवरी में हो सकती है और इसका शेड्यूल अक्टूबर में घोषित किए जाने की संभावना है। एक अधिकारी ने कहा, “अगर आवेदन पांच लाख से कम रहते हैं, तो परीक्षा तीन शिफ्ट में आयोजित की जाएगी, अगर वे पांच लाख से अधिक होते हैं, तो छह शिफ्ट की जरूरत होगी।” अतिरिक्त 10 से 15 मिनट देने का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है। परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे।
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