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लद्दाख में आमने-सामने भारत और चीन की सेना, पैट्रोलिंग के दौरान हुई धक्का-मुक्की

घटना 134 किमी लंबी पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर हुई। बाद में दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर पर बातचीत के बाद स्थिति सामान्य हो गई।

Author नई दिल्ली | Published on: September 12, 2019 9:59 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

भारत और चीन के बीच सीमा तनाव बुधवार को एक बार फिर भड़क गया। दोनों देशों के सेनाएं पूर्वी लद्दाख में भिड़ गईं। एक अंग्रेजी अखबार की खबर के मुताबिक इस दौरान भारतीय और चीन सेनाओं के बीच काफी देर धक्का-मुक्की होती रही। अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि घटना 134 किमी लंबी पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर हुई। बाद में दोनों पक्षों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर पर बातचीत के बाद स्थिति सामान्य हो गई। यहां बता दें कि झील के एक तिहाई हिस्से पर चीन का नियंत्रण है क्योंकि यह तिब्बत से लेकर लद्दाख पर फैली हुई है।

अंग्रेजी अखबार टीओआई ने एक सूत्र के हवाले से बताया, ‘भारतीय सैनिक पैट्रोलिंग पर थे जब उनका सामना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैनिकों से हुआ। इन सैनिकों ने इलाके में भारतीय सैनिकों की उपस्थिति पर कड़ी आपत्ति जताई। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच धक्का-मुक्की होने लगी। इस के बाद दोनों पक्षों ने इलाके में अतिरिक्त सैनिक भेजे। देर शाम तक दोनों पक्षों के बीच इस तरह का संघर्ष जारी रहा।

अखबार ने जब भारतीय सेना से संपर्क किया तो बताया गया कि तनाव करने के लिए दोनों पक्षों के ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारी बातचीत के लिए सहमत हैं। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि एलएसी यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल की स्थिति को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग मान्यताओं के चलते इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं। बाद में इसका समाधान बॉर्डर पर्सनल मीटिंग, फ्लैग मीटिंग या अन्य तरह से किया जाता है।

उल्लेखनीय है कि पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर विवादित फिंगर 5 से फिंगर 8 इलाके में अगस्त 2017 में भी दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई थी। इस दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ पत्थरों और रॉड्स का इस्तेमाल किया। उसी साल डोकलाम में दोनों देशों के सैनिकों के बीच काफी दिनों तक तनातनी रही। 73 दिनों तक एक दूसरे के सामने खड़े रहने के बाद सैनिक वापस अपने स्थान पर चले गए।

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय सेना अरुणाचल प्रदेश में अपना ‘हिम विजय’ अभ्यास करेगी, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत का दौरा करने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि चीन को “हिम विजय” अभ्यास की सूचना नहीं दी गई है क्योंकि वह अरुणाचल प्रदेश में सीमा के करीब आयोजित नहीं किया जाएगा। जानकारी के मुताबिक इसमें 15,000 सैनिक हिस्सा लेंगे।

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