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अभिव्यक्ति और भाषण की आजादी का अधिकार असीमित नहीं है- बॉम्बे HC की टिप्पणी

बेंच ने साफ किया कि 'किसी के बोलने या अभिव्यक्ति की आजादी असीमित नहीं है। शायद लोग यह समझते हैं कि भाषण और अभिव्यक्ति की आजादी बिना किसी प्रतिबंध के असीमित है।'

bombay high court, courtपरिवार में एक गृहिणी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण होती है – बॉम्बे हाई कोर्ट ( फाइल फोटो)

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक अहम निर्देश में कहा है कि अभिव्यक्ति और भाषण की आजादी का अधिकार असीमित नहीं है। दरअसल एक महिला ने ट्विटर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे पर विवादित टिप्पणी की थी। इस मामले पर काफी विवाद हुआ था और इस महिला ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में याचिका लगाई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसी मामले की सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की और महिला की याचिका भी खारिज कर दी।

जस्टिट एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक की बेंच ने हालांकि कहा कि राज्य सरकार मौखिक रुप से यह आश्वासन या विश्वास दिलाए कि महिला सुनैना होले को अगले 2 हफ्तों तक गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। अदालत ने साफ किया कि यह राहत महिला को तब ही मिलेगी जब वो मुंबई और पालघर जिले में जाकर स्थानीय पुलिस को पूछताछ और जांच में पूरा सहयोग करें।

इस महिला ने अपने वकील अभिनव चंद्रचूण के जरिए अदालत से गुहार लगाई थी कि उनके ऊपर लगे सभी चार्ज हटाए जाएं। इसके अलावा महिला ने अदालत से अपनी याचिका में कहा था कि अंतिम निर्णय आने तक उन्हें गिरफ्तार ना करने का आदेश कोर्ट दे। सुनैना के खिलाफ तीन एफआईआऱ दर्ज हैं। पहला केस बीकेसी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज है, दूसरा केस आजाद मैदान थाने में तथा तीसरा Tulinj पुलिस स्टेशन में दर्ज है। महिला के खिलाफ शिवसेना के एक नेता रोहन चौहान के अलावा कई अन्य लोगों ने शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत में कहा गया था कि 38 साल की सुनैना ने सीएम उद्धव ठाकरे और उनके बेटे के खिलाफ विवादित ट्वीट किये हैं। इसी साल अगस्त के महीने में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले में सुनैना को गिरफ्तार किया गया था और फिर बाद में उन्हें बेल भी मिल गई थी।

इसके अलावा 2 एफआईआर में सुनैना को सीआरपीसी के सेक्सन 41A(1) के तहत नोटिस दिया गया था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि सुनैना ने नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया है। अदालत में सुनैना के वकील ने कहा कि सुनैना पुलिस को जांच में सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

बता दें कि नवी मुंबई की रहने वाली सुनैना पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। पुलिस के मुताबिक सुनैना ने 25 और 28 जुलाई के बीच सोशल मीडिया पर कई सारे विवादित पोस्ट डाले थे।

अदालत में सुनवाई के दौरान सुनैना के वकील ने आर्टिकल 19 का हवाला देते हुए कहा कि उनके क्लाइंट को बोलने की आजादी है और इस कार्रवाई से उनके अधिकार का हनन हो रहा है। हालांकि बेंच ने साफ किया कि ‘किसी के बोलने या अभिव्यक्ति की आजादी असीमित नहीं है। शायद लोग यह समझते हैं कि भाषण और अभिव्यक्ति की आजादी बिना किसी प्रतिबंध के असीमित है।’ इस मामले में अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

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