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नक्सल लिंक के आरोपी के घर से मिली “वॉर एंड पीस”, HC जज बोले- दूसरे देश के युद्ध की किताब अपने घर में क्यों रखी?

पुलिस ने गोंजाल्विस के घर से जो सामग्री जब्त की थी उनमें वॉर एंड पीस के अलावा कबीर कला मंच की सीडी राज्य दमन विरोधी, मार्क्सिस्ट आर्काइव्स, जय भीमा कामरेड, अंडरस्टैंडिंग माओइस्ट, आरसीपी रीव्यू के अलावा नेशनल स्टडी सर्किल द्वारा जारी सर्कुलर की प्रतियां भी शामिल थी।

Bombay High Court, Vernon Gonsalves, CPI-Maoist, Leo Tolstoy, War and Peace, Justice Kotwal, Bhima Koregaon, Pune police, Mihir Desai, india news, Hindi news, news in Hindi, latest news, today news in Hindiबॉम्बे हाईकोर्ट आरोपी वर्नन गोंजाल्विस की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही है। (फाइल फोटो)

शैली धयालकर

बॉम्बे हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में एलगार परिषद् से जुड़े एक्टिविस्ट व आरोपी वेरनॉन गोंजाल्विस से कई सवाल पूछे। अदालत ने आरोपी से पूछा कि आपने अपने घर में दूसरे देश की युद्ध की किताब क्यों रखी। हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान लियो टॉल्सटॉय के उपन्यास ‘वॉर एंड पीस’ पर सवाल उठाए।

गोंजाल्विस को कथित रूप से माओवादियों से संबंध रखने के मामले में पुणे पुलिस ने पिछले साल 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने गोंजाल्विस के घर से जो सामग्री जब्त की थी उनमें वॉर एंड पीस के अलावा कबीर कला मंच की सीडी राज्य दमन विरोधी, मार्क्सिस्ट आर्काइव्स, जय भीमा कामरेड, अंडरस्टैंडिंग माओइस्ट, आरसीपी रीव्यू के अलावा नेशनल स्टडी सर्किल द्वारा जारी सर्कुलर की प्रतियां भी शामिल थी।

बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान इन किताबों और सीडी का जिक्र किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सारंग कोतवाल ने कहा कि आपने दूसरे देश की युद्ध की किताब अपने घर में क्यों रखी है। हालांकि, जस्टिस कोतवाल ने इस बात का उल्लेख किया कि सीडी में शामिल कंटेंट चार्जशीट का हिस्सा नहीं है।

सुनवाई के दौरान गोंजाल्विस के वकील मिहिर देसाई ने पुणे पुलिस ने उनके मुवक्किल के खिलाफ पूरे मामले को कुछ ई-मेल और पत्रों के आधार पर तैयार किया है। ये सामग्री अन्य लोगों के कम्प्यूटर से मिली थी। देसाई ने कहा कि इनमें से एक भी पत्र या ई-मेल उनके मुवक्किल ने नहीं लिखा या इनमें उनके वकील को संबोधित नहीं किया गया ता।

इसलिए उनके मुवक्किल के खिलाफ किसी ठोस सबूत के अभाव में अदालत द्वारा जमानत से इनकार नहीं किया जाना चाहिए। देसाई ने यह भी दलील दी कि ऐसी किताबों या सीडी रखने से उनके मुवक्किल आतंकवादी या किसी प्रतिबंधित माओवादी संगठन के सदस्य नहीं बन जाते। इस पर जस्टिस ने सहमति जताते हुए कहा कि गोंजाल्विस को यह स्पष्ट करना होगा कि उनके पास यह सामग्री क्यों रखी हुई थी।

पुलिस का दावा है कि 31 दिसंबर 2017 को आरोपियों की तरफ से दिए गए भाषण के बाद ही भीमा कोरेगांव के आसपास जातीय हिंसा भड़की थी। पुलिस एलगार परिषद् के आयोजन के तार कथित रूप से नक्सली संगठन से जुड़े होने के मामले की जांच भी कर रही है। पुलिस ने इस मामले में गोंजाल्विस के अलावा शिक्षाविद् शोमा सेन, रोना विल्सन, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा और गौतम नवलखा को भी गिरफ्तार किया था।

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