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3 महीने जांच के बाद भी न मिल पाए अर्नब गोस्वामी के Republic TV के खिलाफ सबूत, HC की पुलिस को फटकार

बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति मनीष पिताले ने महाराष्ट्र सरकार से यह भी पूछा कि टीआरपी घोटाला मामले में जांच कब खत्म होगी।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र मुंबई | Updated: March 20, 2021 2:00 PM
Bombay HC, Arnab Goswamiटीआरपी घोटाले के मामले में मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी को आरोपी बनाया है, इसके खिलाफ रिपब्लिक टीवी बॉम्बे हाईकोर्ट गया है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने टीआरपी स्कैम मामले को लेकर मुंबई पुलिस को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि तीन महीने चली जांच के बावजूद मुंबई पुलिस के पास ‘रिकॉर्ड पर’ ऐसे साक्ष्य नहीं हैं, जिनसे रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी और एआरजी आउटलियर मीडिया को टीआरपी घोटाला मामले में आरोपी बनाया जा सके।

न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति मनीष पिताले ने महाराष्ट्र सरकार से यह भी पूछा कि इस मामले में जांच कब खत्म होगी। अदालत ने कहा कि सरकार को तर्कसंगत बात करनी चाहिए और यदि पुलिस को गोस्वामी तथा अन्य के विरुद्ध कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिलता है तो इसे स्वीकार करना चाहिए तथा इस संबंध में बयान जारी करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि पुलिस की जांच तीन महीने से जारी है, लेकिन हमें ऐसा कुछ नहीं दिखा, जिससे याचिकाकर्ताओं को आरोपियों के तौर पर दर्शाया गया हो।

बेंच का तर्क- हमेशा के लिए नहीं कर सकते जांच: बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में मुंबई पुलिस से सवाल किया था कि जब पुलिस कथित टीआरपी घोटाले में रिपब्लिक टीवी और उसके प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी के विरूद्ध पर्याप्त सबूत होने का दावा कर चुकी है तो उसने इस मामले में उन्हें बतौर आरोपी नामजद क्यों नहीं किया। तब बेंच ने विशेष सरकारी वकील शिशिर हिरय को अदालत को यह बताने को कहा कि पुलिस की गोस्वामी एवं रिपब्लिक टीवी के विरूद्ध कार्यवाही आगे बढ़ाने की योजना है या नहीं।

इस पर अभियोजन पक्ष के वकील दीपक ठाकरे ने कोर्ट को बताया था कि पुलिस अभी भी मामले में सबूत जुटाने में लगी है और रिपब्लिक टीवी चैनल को चलाने वाले एआरजी आउटलियर मीडिया पर जांच जारी रखना चाहती है। हालांकि, इस पर कोर्ट ने डांट लगाते हुए कहा था कि कोई भी जांच हमेशा के लिए नहीं जारी रह सकती। ईडी, सीबीआई और राज्य पुलिस सभी को तर्कसंगतता और यथार्थ मूल्यांकन करने चाहिए, न कि एक-दूसरे के लिए बाधा बनना चाहिए।

टीआरपी घोटाले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी घिर चुकी है मुंबई पुलिस: उच्च न्यायालय ने तब कहा था, ‘‘आप (मुंबई पुलिस) पिछले तीन महीने से जांच कर रहे हैं। दो आरोपपत्र हैं और ऐसा जान पड़ता है कि उनके विरूद्ध सबूत नहीं है। और यह प्राथमिकी अक्टूबर, 2020 की है। हम मार्च, 2021 में हैं।’’ गौरतलब है कि इससे पहले हाईकोर्ट मुंबई पुलिस को टीआरपी घोटाले के मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने को लेकर भी सवाल पूछ चुकी है। बेंच ने पूछा था कि क्या प्रेस से संवाद करना पुलिस का दायित्व है? (पुलिस) आयुक्त को प्रेस से बातचीत क्यों करनी पड़ी थी।

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