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नोटबंदी से खफा दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र ने उड़ाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में बम की अफवाह, कहा-चाहता हूं बीजेपी हारे यूपी चुनाव

पुलिस ने टेक्निकल टीम की मदद से आरोपी को बाहरी दिल्ली के भलस्वा डेरी इलाके से पकड़ा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपये के नोटों को अमान्य करार दे दिया था, लेकिन बाद पूरे देश में कैश की किल्लत हो गई थी।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक छात्र ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में गड़बड़ फैलाने के मकसद से फोन पर बम रखने की झूठी बात कहकर सनसनी फैला दी। पुलिस ने बताया कि यह छात्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले से नाराज था और चाहता था कि बीजेपी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हार जाए। 21 साल के छात्र को सोमवार को उसके फोन करने के कुछ ही घंटों बाद गिरफ्तार कर लिया गया। उसने दिल्ली पुलिस के कंट्रोल रूम में फोन कर बताया था कि प्रधानमंत्री की मऊ वाली रैली में बम धमाका होगा। लेकिन रैली में एेसा कुछ नहीं हुआ। इस छात्र की पहचान दीपक के तौर पर हुई है।

एक वरिष्ठ पुलिस अफसर ने बताया कि दीपक नरेंद्र मोदी सरकार के काम करने के तरीकों से खफा था और नोटबंदी से फैसले ने उसके गुस्से को और बढ़ा दिया। पुलिस के मुताबिक, दीपक को लगा कि उसके फोन करने से प्रधानमंत्री की रैली रद्द हो जाएगी और बीजेपी चुनाव हार जाएगी। पुलिस को उसके पास से एक डायरी भी मिली है, जिसमें बीजेपी और नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाए गए हैं। दीपक से कई एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं।

एेसे आया हत्थे: अडिशनल डीसीपी (नॉर्थ-वेस्ट) विजयंत आर्य ने बताया कि उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला यह छात्र स्कूल अॉफ ओपन लर्निंग से बीए कर रहा है। उसने कथित तौर पर अपनी आंटी द्वारा फेंकी गई सिम कार्ड से रैली में बम रखे होने की झूठी कॉल की। इसके तुरंत बाद ही उसने फोन स्विच अॉफ कर दिया। दिल्ली पुलिस की टीम ने जब छानबीन की तो सिम का अड्रेस एक महिला का आया, जो आदर्श नगर इलाके में रहती थी। महिला ने पुलिस को बताया कि उसने सिम फेंक दी थी। इसके बाद पुलिस ने टेक्निकल टीम की मदद से आरोपी को बाहरी दिल्ली के भलस्वा डेरी इलाके से पकड़ा।

उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के छठे चरण का मतदान 4 मार्च को होगा। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने रैली के दौरान कहा था कि उनकी पार्टी चुनावों के नतीजे को नोटबंदी पर लोगों की प्रतिक्रिया के तौर पर लेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपये के नोटों को अमान्य करार दे दिया था, लेकिन बाद पूरे देश में कैश की किल्लत हो गई थी।

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