Supreme Court on Bofors Scam: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बोफोर्स घोटाले के मामले को खत्म कर दिया है। कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। हाई कोर्ट ने बोफोर्स मामले में हिंदुजा बंधुओं और स्वीडिश हथियार निर्माता एबी बोफोर्स के खिलाफ सभी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया था। इसको लेकर ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में बोफोर्स मामले में जस्टिस जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने अधिवक्ता अजय के अग्रवाल द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिससे दशकों पुराने मामले में कार्यवाही को पुनर्जीवित करने का एक और प्रयास प्रभावी रूप से समाप्त हो गया।
मामले को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता
कोर्ट में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अजय अग्रवाल ने याचिका से श्रीचंद पी. हिंदुजा और गोपीचंद पी. हिंदुजा के नाम हटाने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा, क्योंकि दोनों का निधन हो चुका था। हालांकि, पीठ ने अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया और संकेत दिया कि मामले को और आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
मुकदमे को जारी रखने के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए जस्टिस पारदीवाला ने पूछा कि जब दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2005 में ही कार्यवाही को रद्द कर दिया था और सीबीआई द्वारा उस फैसले को दी गई चुनौती भी विफल हो गई थी, तो अब किस बात पर फैसला होना बाकी है।
क्या था दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला?
बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 मई, 2005 को एक ऐतिहासिक फैसले में श्रीचंद, गोपीचंद और प्रकाश हिंदुजा के साथ-साथ एबी बोफोर्स को सभी आपराधिक आरोपों से बरी कर दिया था। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों में गंभीर कमियां पाईं और कहा कि सीबीआई 1986 के बोफोर्स सौदे को सुरक्षित करने में हिंदुजा बंधुओं की किसी भी प्रत्यक्ष भूमिका को स्थापित करने या यह साबित करने में विफल रही कि उनके द्वारा कथित रूप से प्राप्त धन अवैध कमीशन से जुड़ा था।
सीबीआई की कड़ी आलोचना
हाईकोर्ट ने गौर किया था कि सीबीआई द्वारा स्वीडिश अधिकारियों से प्राप्त दस्तावेज न तो मूल अभिलेख थे और न ही प्रमाणित कॉपीज थी। न्यायालय ने टिप्पणी की कि इस प्रकार की अप्रमाणित सामग्री के आधार पर अभियुक्तों पर मुकदमा चलाना जनता के समय और धन की बर्बादी होगी और मुकदमे का सामना कर रहे लोगों के साथ अन्याय होगा।
इसके अलावा फैसले में सीबीआई जांच की भी कड़ी आलोचना की गई जिसमें कथित तौर पर सरकारी खजाने को लगभग 250 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। फैसले के बाद हिंदुजा बंधुओं को मामले से बरी कर दिया गया और उनकी जमानत राशि वापस करने का आदेश दिया गया, जिससे लगभग 14 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई का अंत हुआ।
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सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे शख्स को बरी किया है, जिसे अपनी जिंदगी के 22 साल जेल में गुजारने पड़े। यह सब उसे ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट की वजह से भुगतना पड़ा। क्योंकि ट्रायल कोर्ट ने सबूतों की सही से जांच नहीं की और दोषी ठहराए जाने के बाद हाई कोर्ट ने उसकी अपील पर सुनवाई नहीं की, यानी हाई कोर्ट मौन बना रहा। जिसके बाद उसने शीर्ष अदालत में गुहार लगाई। पढ़िए पूरी खबर…
