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यूपी के आला अफसर ने माना, नदियों में उतराते शव कोविड से मरने वालों के

जिलों को लिखा पत्र, अब कोई शव न फेंक पाए, पुलिस गश्त लगाए, शवों की अंत्येष्टि के लिए सरकार देगी 5000 रुपए

बिहार के सारण जिले के जयप्रभा सेतु से घाघरा नदी पर फेंकी जा रही हैं कोविड से मृत लोगों की लाशें। (फोटो-पीटीआई फाइल)

गंगा में उतराते मिले शवों पर पहली बार सरकारी प्रतिक्रिया आई है। यूपी के एक आला अधिकारी के लिखे पत्र में कहा गया है कि कोविड से मरने वालों के शव नदियों में फेंके गए हैं।

आला अधिकारी मनोज कुमार सिंह है ने उपर्युक्त बात 14 मई को विभिन्न जिलों के मुखियों को लिखे पत्र में कही है। पत्र में उन्होंने यह भी लिखा है कि पानी में उतराते तीन-चार शवों का पोस्ट मार्टम कराया गया। लेकिन शवों में कोरोना के विषाणु नहीं मिले। इसी के साथ वे यह भी सवाल उठाते हैं कि क्या पानी में सड़ चुके शवों में वाइरस मिल भी सकता था क्या।

पत्र कहता है कि कोविड से मरने वालों के शवों को नदियों में फेंके जाने की जानकारी प्रशासन के पास है। मनोज कुमार सिंह ने ऐसा किए जाने के कुछ कारण गिनाए हैं। पहला गरीबी, दूसरा जलाने वाली लकड़ी का अभाव और तीसरे कोविड फैलने का डर। इसी के साथ उन्होंने ग्रामीण अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अब आइंदा से कोई शवों को नदियों में न फेंक पाए, यह बात वे सुनिश्चित करें। इसके लिए नदियों के किनारे पुलिस गश्त लगाने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रति शव पांच हजार देगी। दफनाने के लिए भी और जलाने के लिए भी।

उल्लेखनीय है कि देश में कुछ हफ्तों से रोजाना की औसत मृतक संख्या चार हजार के आसपास रही है। यह गिनती सरकारी है। विपक्ष लगातार कहता आया है कि असली मृतक संख्या बहुत ज्यादा है। विदेशी अखबार तो यह संख्या 15-20 हजार भी बता चुके हैं।

अभी शनिवार को यूपी सरकार के प्रवक्ता नवनीत सहगल ने गंगा में उतराते 2000 शव बाहर निकाले जाने के आरोप का खंडन किया था। उन्होंने कभी कभी दस बीस शवों की बात मानी थी लेकिन यह कहते हुए कि कुछ तटवर्ती गांवों में शव को बहा देने की परंपरा रही है।

यूपी सरकार ने भले ही उतराते शवों पर अपनी बात कही हो लेकिन बिहार सरकार अब तक खामोश है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों जब बक्सर में गंगा तट पर मुर्दे उतराए तो बिहार के अफसरों ने इसके लिए यूपी को दोषी ठहरा दिया था। दरअसल गंगा का एक तट बक्सर में है और दूसरा बलिया में।

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