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सीबीएसई के तीन बड़े फैसले- दसवीं बोर्ड परीक्षा अनिवार्य, सारे प्रिंसिपल को देना होगा टेस्ट, लागू करना होगा थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला

CBSE ने छह साल पहले दसवीं में बोर्ड की परीक्षा देने को वैकल्पिक कर दिया था। तब स्टूडेंट के पास विकल्प था कि वह बोर्ड का पेपर दे या फिर CCE वाला।

cbse, schoolsबोर्ड ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट के आधार पर ही प्रिंसिपलों के लिए एक टेस्ट तैयार किया है, जो उन्हें पास करना होगा

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन (CBSE) ने अपने सभी 18000 स्कूलों के लिए तीन बड़े फैसले किए हैं। मंगलवार को बोर्ड की चार घंटे चली बैठक में यह फैसले लिए गए हैं। इसके मुताबिक, सीबीएसई बोर्ड के सभी स्कूलों को दसवीं क्लास तक थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करना होगा। वर्तमान में यह फॉर्मूला सिर्फ आठवीं क्लास तक लागू था। इसके अलावा सीबीएसई के सभी छात्रों के लिए साल 2018 से दसवीं बोर्ड परीक्षा अनिवार्य कर दी गई हैं, साथ ही सभी स्कूलों के प्रिंसिपल को योग्यता (eligibility) टेस्ट भी देना होगा। सूत्रों ने बताया कि इन तीनों फैसलों पर आखिरी मुहर एचआरडी मंत्रालय को लगानी है।

बोर्ड एग्जाम मार्च 2018 में होंगे। तय किया गया है कि 80 प्रतिशत नंबर बोर्ड के पेपर और 20 प्रतिशत इंटरनल एसेसमेंट के होंगे। गौरतलब है कि CBSE ने छह साल पहले दसवीं में बोर्ड की परीक्षा देने को वैकल्पिक कर दिया था। उस वक्त Continuous and Comprehensive Evaluation (CCE) को लाया गया था। तब स्टूडेंट के पास विकल्प था कि वह बोर्ड का पेपर दे या फिर CCE वाला। जानकारी के मुताबिक, CBSE की गवर्निंग बॉडी के सदस्यों ने एक सर्वे करवाया था। उसमें यह बात निकलकर सामने आई कि ज्यादातर लोग चाहते हैं कि दसवीं में बोर्ड की फिर से वापसी हो जाए। फिलहाल जो स्टूडेंट दसवीं क्लास में पढ़ रहे हैं उनपर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वह उसी फॉर्मेट में एग्जाम देते रहेंगे जिसमें पिछले छह सालों से हो रहे थे।

क्या है थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के आंतर्गत आने वाले थ्री लैंगवेज फॉर्मूला का मतलब होता है – हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी और इंग्लिश के अलावा एक अन्य भारतीय मॉडर्न लैंग्वेज भी सिखानी होगी। वहीं, हिंदी भाषी से अलग राज्यों में हिंदी, इंग्लिश और एक स्थानीय भाषा सिखानी होगी। हालांकि 18 हजार स्कूलों में से अधिकतर में कक्षा आठ तक स्थानीय भाषा/हिंदी, इंग्लिश और एक विदेशी भाषा जैसे जर्मन आदि सिखाई जा रही है। बोर्ड ने कहा कि स्कूलों को ना सिर्फ यह फॉर्मूला लागू करना होगा, बल्कि इसे 10वीं तक बढ़ाना भी होगा।

बोर्ड बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि सीबीएसई स्कूलों के सभी प्रिंसिपल को योग्यता टेस्ट पास करना होगा। बोर्ड मेंबर के एक अधिकारी ने बताया, “देखने में आया है कि स्कूल के मालिक की पत्नी या रिश्तेदार को ही प्रिंसिपल बना दिया जाता है। यह किसी भी स्कूल का प्रिंसिपल बनने की योग्यता नहीं है। इसलिए बोर्ड ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट के आधार पर ही प्रिंसिपलों के लिए एक टेस्ट तैयार किया है, जो उन्हें पास करना होगा।”

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