वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अश्विनी भिडे को बीएमसी की पहली महिला कमिश्नर नियुक्त किया गया है। इसके जरिये सीएम देवेंद्र फड़नवीस के नेतृत्व वाली महायुति ने एक बार फिर लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ने की कोशिश की है।

सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “भिडे को मुंबई में बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को क्रियान्वित करने में उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर चुना गया था। हालांकि, फड़नवीस उन्हें बीएमसी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला के रूप में नियुक्त करके एक मजबूत संदेश भी देना चाहते थे। दशकों से महाराष्ट्र में कई प्रमुख महिला नौकरशाह रही हैं, लेकिन बीएमसी में कभी कोई महिला कमिश्नर नहीं रही है।” इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा कि भिडे के नाम की औपचारिक घोषणा से पहले दोनों डिप्टी सीएम से भी विचार-विमर्श किया गया था।

एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने दावा किया कि फड़नवीस हमेशा से समानता में भरोस रखते आए हैं और कहा कि प्रमुख संगठनों में शीर्ष पदों पर महिलाओं की कमी ने मुख्यमंत्री को नाराज कर दिया है। यह पहली बार नहीं है कि फड़नवीस ने राज्य में महिला नौकरशाहों को शीर्ष पदों पर पदोन्नत किया है। जनवरी 2024 में तत्कालीन शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में गृह मंत्रालय के साथ उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत रहते हुए फड़नवीस ने आईपीएस अधिकारी रश्मी शुक्ला को महाराष्ट्र की डीजीपी नियुक्त किया था।

1988 बैच की आईपीएस अधिकारी शुक्ला ने इससे पहले 2023 में सशस्त्र सीमा बल की एडीजी और 2021 में सीआरपीएफ में एडीजी के तौर पर काम किया था। उन्होंने पुणे की पुलिस कमिश्नर के रूप में भी कार्य किया है और राज्य खुफिया ब्यूरो का नेतृत्व किया है। जून 2024 में, कहा जाता है कि फड़नवीस ने आईएएस अधिकारी सुजाता सौनिक को राज्य की पहली महिला मुख्य सचिव के रूप में नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा था। इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री शिंदे ने मंजूरी दे दी थी।

भिडे के पक्ष में क्या बात काम आई?

सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि एक प्रमुख महिला नौकरशाह होने के अलावा फड़नवीस देश के सबसे अमीर निकाय बीएमसी के शीर्ष पर एक भरोसेमंद प्रशासक चाहते थे। सूत्र ने बताया, “जीत के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। मुंबई को बदलाव करने जैसे वादों को पूरा करने में हम चूक नहीं कर सकते। फड़नवीस ऐसे व्यक्ति की तलाश में थे जिनके पास मजबूत प्रशासनिक अनुभव हो और जो लोक सेवा के प्रति गहरी प्रतिबद्धता रखते हों।”

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पिछली कांग्रेस-एनसीपी सरकार में एक पूर्व मंत्री ने बताया कि चिटकला जुत्शी, चंद्र अयंगर और मेधा गाडगिल जैसी महिला नौकरशाहों को महत्वपूर्ण भूमिकाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि मुख्य सचिव और बीएमसी आयुक्त जैसे पद पारंपरिक रूप से पुरुषों के पास रहे हैं।

महाराष्ट्र में महिलाओं का प्रतिनिधित्व

केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण कानून लागू करने की तैयारी के मद्देनजर राज्य बीजेपी सरकार भी इसके लिए जुटती नजर आ रही है। महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने हाल ही में अपनी 43 सदस्यीय टीम में 10 महिलाओं को शामिल किया है। राज्य में महिलाओं के लिए आरक्षण नीति तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार द्वारा 1994 में लागू की गई थी। बाद में इस कोटे को बढ़ाकर 50% कर दिया गया।

1 मई 1960 को महाराष्ट्र के गठन के बाद से, मंत्रिमंडल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम ही रहा है। लगातार सरकारों में आमतौर पर कुछ ही महिला मंत्री शामिल रही हैं। वर्तमान में 288 सदस्यीय राज्य विधानसभा में, सभी दलों की 21 महिला विधायक हैं। फड़नवीस के 43 सदस्यीय मंत्रिमंडल में पांच महिला मंत्री हैं। इनमें से तीन पंकजा मुंडे, मेघना बोरदिकर और माधुरी मिसल बीजेपी से हैं, जबकि सुनेत्रा पवार और अदिति तटकरे एनसीपी का प्रतिनिधित्व करती हैं।

विवादों में आईं बीएमसी मेयर रितु तावड़े

पिछले हफ्ते सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल होने के बाद एक विवाद खड़ा हो गया। इन तस्वीरों में मुंबई की मेयर रितु तावड़े की सरकारी गाड़ी पर लाल और नीली चमकने वाली लाइट लगी हुई दिखाई दे रही थीं। नियमों के संभावित उल्लंघन को लेकर हुई आलोचना के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने रविवार (15 मार्च) को बताया कि मेयर की गाड़ी और उनके साथ चलने वाली एस्कॉर्ट गाड़ी से लाइट हटा दी गई हैं। इस घटना ने एक बार फिर महाराष्ट्र में गाड़ियों पर लाल-नीली लाइटों के इस्तेमाल से जुड़े नियमों की ओर लोगों का ध्यान खींचा है। पढ़ें पूरी खबर…