BKU के राकेश टिकैत बोले- MSP पर बात नहीं करना चाहती सरकार, चार दिनों पहले लिखी चिट्ठी का नहीं मिला जवाब

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार को हैदराबाद में किसानों को संबोधित करते हुए एक बार मोदी सरकार का घेराव किया।

Uttar Pradesh, Yogi Adityanath
किसान नेता राकेश टिकैत (फोटो सोर्स – पीटीआई)

भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार को हैदराबाद में किसानों को संबोधित करते हुए एक बार मोदी सरकार का घेराव किया। कृषि कानूनों पर चर्चा करते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने आज कहा कि केंद्र सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी का कानून बनाना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों के पूरा होने तक आंदोलन खत्न नहीं होगा। सरकार MSP पर बात नहीं करना चाहती है, हमने चार दिन पहले इसे लेकर सरकार को चिट्ठी लिखी है लेकिन इसका कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने कहा कि MSP पर कानून बनने से पूरे देश के किसानों को फायदा होगा।

ओवैसी पर भड़के राकेश टिकैत: हैदराबाद में किसान नेता राकेश टिकैत ने ओवैसी को BJP की टीम-बी कहा। BKU के टिकैत ने बिना नाम लिए कहा कि वो देश में BJP की सबसे बड़ी मदद करता है, उसको यहीं बांधकर रखो, कहीं जाने मत दो।

किसान नेताओं की मांग: किसान नेताओं का कहना है कि सरकार ने हमारी तीनों कृषि कानूनों वापसी की मांग को मान लिया है लेकिन हमारी जो अन्य मांगे हैं उनके लिए हम सरकार को चिट्ठी लिख चुके हैं। बताते चलें कि बुधवार को कैबिनेट में इन तीनों कृषि कानूनों की वापसी की मंजूरी भी हो गई है। किसान नेताओं ने कहा कि हम भी यह चाहते हैं कि सरकार हमारी मांगें जल्द से जल्द माने, ताकि हम अपने घरों का रुख कर सकें।

दर्शनपाल सिंह ने कहा कि तीनों कानून तो वापस हो चुके हैं और सरकार MSP की गारंटी के कानून पर हमें आश्वासन दे, कमेटी बनाकर इसको लागू करें और किसान आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज हुए मुकदमे वापस ले।

दिल्ली की सीमाओं पर बढ़ रही है किसानों की संख्या: 26 नवंबर को दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के आंदोलन को 1 साल पूरा होने जा रहा है। इस मौके पर संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों से यहां पहुंचने की अपील की है। जिसके चलते अब दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन में इनकी संख्या में इजाफा हो रहा है।

बता दें कि कृषि कानून पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई कमिटी के सदस्य अनिल घनवट ने कहा है कि MSP का कानून अगर आता है तो इससे नुकसान होगा। वहीं कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान के बाद उन्होंने कहा था कि यह तीनों कानून वापस लेने नहीं चाहिए थे। कानूनों में सुधार की गुंजाइश थी।

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