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BKU के राकेश टिकैत ने कहा- फिर शुरू हो सकता है किसान आंदोलन, ओवैसी के सवाल पर दी यह प्रतिक्रिया

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार हमारे वादों पर बहुत धीमी गति से काम कर रही है। अगर हमारे वादे पूरे नहीं किए गए तो किसान दोबारा से आंदोलन कर सकते हैं।

किसान नेता राकेश टिकैत ने ओवैसी को लेकर कहा कि वे भाजपा से भी खतरनाक हैं। (एक्सप्रेस फोटो)

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि सरकार ने अभी सिर्फ तीनों कृषि कानून ही वापस लिए हैं। बाकी मांगे पूरी नहीं हुई है। अगर वादे पूरे नहीं किए गए तो आंदोलन दोबारा से हो सकता है। साथ ही उन्होंने एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी को लेकर कहा कि ये भाजपा से भी ज्यादा खतरनाक है।

शनिवार को जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे किसान नेता राकेश टिकैत ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने अभी सिर्फ तीनों कृषि कानून वापस लिए हैं। उन्होंने एमएसपी पर कानून नहीं बनाया है। सरकार ने कमेटी बनाने की बात जरूर कही है लेकिन सरकार बहुत धीमी गति से काम कर रही है। अगर हमारे वादे पूरे नहीं किए गए तो जल्दी ही किसान दोबारा से आंदोलन कर सकते हैं।

इस दौरान उन्होंने हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी को लेकर कहा कि लोगों को उनसे सावधान रहना चाहिए। वे भाजपा से भी ज्यादा खतरनाक हैं। साथ ही उन्होंने आगामी उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कहा कि उत्तरप्रदेश का किसान उनको फायदा पहुंचाने वाले राजनीतिक दल को ही वोट करेगा।

इसी बीच शनिवार को पंजाब के 22 किसान संगठनों ने चुनाव लड़ने का फैसला किया है। किसान संगठनों ने मिलकर एक पार्टी बनाई है जिसका नाम संयुक्त समाज मोर्चा रखा गया है। इस पार्टी का नेतृत्व किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल करेंगे। ये पार्टी पंजाब विधानसभा के सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। पार्टी बनाने के फैसले पर राजेवाल ने कहा कि यह निर्णय पंजाब के लोगों की मांग और भारी दबाव के बाद लिया गया है। किसान संगठनों द्वारा बनाई गई पार्टी में तीन और किसान संगठनों के शामिल होने की चर्चा है।

हालांकि संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े कई किसान संगठनों ने चुनाव से दूर रहने का फैसला किया है। इसमें कीर्ति किसान संघ, क्रांतिकारी किसान संघ, बीकेयू-क्रांतिकारी, दोआबा संघर्ष समिति, बीकेयू-सिद्धूपुर, बीकेयू-उग्राहां, बीकेयू-अराजनैतिक, किसान संघर्ष समिति और जय किसान आंदोलन शामिल है। संयुक्त किसान मोर्चा ने इसे लेकर स्पष्ट कहा है कि उनका राजनीति से कोई लेना देना नहीं है। चुनाव लड़ने वाले नेता मोर्चा में शामिल रहेंगे या नहीं, इसका फैसला 15 जनवरी को होने वाले मीटिंग में लिया जाएगा।

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