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राकेश टिकैत बोले- सरकार नहीं मानी तो यूपी में भी हराएंगे चुनाव, गांव-गांव जाएंगे

उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं। इस दौरान वहां भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए किसान संगठनों ने कमर कस ली है। किसान संगठनों का कहना है कि बंगाल में ममता बनर्जी की जीत में उनकी अहम भूमिका थी।

farmers protest, farm bill, BKU leader, rakesh tikait, modi government,target corporates godowns, jansattafarmers protest: भारतीय किसान यूनियन नेता राकेश सिंह टिकैत। (twitter/rakesh tikait)

पिछले कई महीनों से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसान संगठनों ने पांच राज्यों के चुनाव से पहले घोषणा की थी कि वे बीजेपी को हराने के लिए लोगों से अपील करेंगे और केंद्र की असलियत लोगों को बताएंगे। अब पश्चिम बंगाल में भाजपा की हार के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार नहीं मानी तो यूपी में भी हराएंगे। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि इसके लिए गांव-गांव जाकर लोगों से मिलेंगे।

उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने वाले हैं। इस दौरान वहां भाजपा को कड़ी टक्कर देने के लिए किसान संगठनों ने कमर कस ली है। किसान संगठनों का कहना है कि बंगाल में ममता बनर्जी की जीत में उनकी अहम भूमिका थी। उनकी अपील पर ही वहां की जनता ने भाजपा को सत्ता से दूर रखा है। किसान संगठनों का कहना है कि भाजपा सरकार गरीब और किसान विरोधी है। कहा कि वे पांच महीने से धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा, “पश्चिम बंगाल की हार से सरकार को समझ में आ जाना चाहिए कि किसान संगठन सरकार से बात करने को तैयार हैं, सरकार को बगैर देरी के तीनों कृषि कानूनों को रद्द कर देना चाहिए। इसके साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की गारंटी के लिए नया कानून बनाने की घोषणा करनी चाहिए।

सरकार ने अगर हमारी बातें नहीं मानी तो 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा का विरोध किया जाएगा। गांव-गांव जाकर भाजपा के बजाए किसी भी दूसरे राजनीतिक दल को वोट देने की अपील की जाएगी।”

गौरतलब बात यह है कि अभी हाल ही में आए चुनाव परिणामों में भाजपा को उसकी उम्मीदों के मुताबिक सीटें नहीं मिलीं। सबसे ज्यादा नुकसान पश्चिम बंगाल में हुआ, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने 292 सीट में से 213 सीटें जीत लीं। वहीं भाजपा 77 सीट ही पा सकी। हालांकि वह वहां सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बन गई है।

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