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BJP का 41वां स्थापना दिवसः कभी LS में थीं 2 सीटें, आज हैं 300 सांसद; अटल-आडवाणी से लेकर पार्टी उदय में रहा RSS का भी ‘हाथ’

1984 के बाद आरएसएस की तरफ से शुरू किये गए मंदिर आंदोलन को बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी मेहनत के दम पर देश भर में पहुंचाया।

BJP, RSS, Narendra Modiप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के अन्य वरिष्ठ नेता (फोटो सोर्स – एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

भारतीय जनता पार्टी मंगलवार को अपना 41 वां स्थापना दिवस मना रही है। 6 अप्रैल 1980 को बीजेपी की स्थापना की गयी थी। बीजेपी ने इस दौरान शुन्य से शिखर तक का सफर तय किया है। 1984 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मात्र 2 सीट मिली थी वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 300 के आंकड़े को भी पार कर लिया। पार्टी को इस दौरान आरएसएस का भी लगातार साथ मिलता रहा है।

भारतीय जनता पार्टी को आरएसएस का राजनीतिक संगठन माना जाता रहा है। 1977 में जनसंघ का जनता पार्टी में विलय के बाद 1980 में जनता पार्टी से निकल कर बीजेपी का गठन किया गया था। अटल बिहारी वाजपेयी पार्टी के पहले अध्यक्ष बने थे। हालांकि पार्टी की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी। इंदिरा गांधी की मौत के बाद हुए 1984 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को महज दो सीटों पर जीत मिली थी।

मंदिर आंदोलन ने बनाया मजबूत: 1984 के बाद आरएसएस की तरफ से शुरू किये गए मंदिर आंदोलन को बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने अपनी मेहनत के दम पर देश भर में पहुंचाया। राम मंदिर आंदोलन ने बीजेपी को हिंदी भाषी राज्यों में मजबूत पकड़ बना दी। एक के बाद एक रथ यात्रा कर लालकृष्ण आडवाणी ने देश भर में लोगों को अपने साथ जोड़ा।

गठबंधन की राजनीति का सफल प्रयोग: 1977 और 1989 में गठबंधन की असफलता के बाद भी भारतीय जनता पार्टी ने गठबंधन की राजनीति के लिए प्रयोग जारी रखा। बीजेपी ने इस दौरान कांग्रेस और कुछ दलों को छोड़कर लगभग तमाम दलों के साथ कभी न कभी गठबंधन कर अपने आधार को मजबूत बनाया।

अटल-आडवाणी के बाद मोदी और अमित शाह का जलवा: 2009 के लोकसभा चुनाव आते-आते अटल-आडवाणी की जोड़ी राजनीति के मैदान से बाहर हो चुकी थी। इसके विकल्प के रूप में बीजेपी ने 2014 आते-आते नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी को मैदान में उतार दिया। इस जोड़ी ने बीजेपी को दुनिया का ही सबसे बड़ा राजनीतिक दल बना दिया।

स्वदेशी आंदोलन से लेकर FDI तक का समर्थन: 1990 तक भारतीय जनता पार्टी को स्वदेशी आंदोलन का समर्थक माना जाता था। लेकिन समय के साथ पार्टी ने अपनी आर्थिक नीतियों में कई बदलाव किए और सरकार बनने के बाद FDI को बढ़ावा देने के लिए भी काम किया।

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