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श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर बोले नड्डा, कहा- नेहरू ने नहीं होने दी मौत की जांच, बलिदान बेकार नहीं जाने देंगे

भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि देशभर की लोगों की मांग के बावजूद नेहरू ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौत की जांच के आदेश नहीं दिए। उन्होंने कहा कि भाजपा इसका पता लगाने को लेकर प्रतिबद्ध है।

BJP Working President, Cabinet Minister, Pandit Nehru, Jawahar lal nehru, shayama prasad mukherjee, death case, probe order, JP Nadda, Amit Shah, BJP, Congress, india news, Hindi news, news in Hindi, latest news, today news in Hindiकेंद्रीय मंत्री नड्डा ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। (फोटोः एएनआई)

भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उनकी मौत के मामले को प्रमुखता से उठाया। मुखर्जी को श्रद्धांजलि देने के बाद नड्डा ने कहा कि पूरा देश श्यामा प्रसाद मुखर्जी के मौत की जांच की मांग कर रहा था उस समय नेहरू ने जांच के आदेश नहीं दिए थे।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके बलिदान दिवस पर नमन किया और कहा कि डॉ. मुखर्जी ने अपना पूरा जीवन भारत की एकता और अखंडता को सर्मिपत कर दिया। प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा, ‘डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके बलिदान दिवस पर स्मरण कर रहा हूं। एक सर्मिपत देशभक्त और राष्ट्रवादी।’

इससे पहले नड्डा ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है। केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का बलिदान बेकार नहीं जाएगा। भाजपा इसको लेकर प्रतिबद्ध है। इससे पहले भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने भी भाजपा मुख्यालय में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान पार्टी के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे।

नड्डा ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने कहा था कि भारत के लिए तिरंगे का सम्मान होना चाहिए। इसलिए दो निशान, दो विधान और दो प्रधान नहीं चल सकते। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुखर्जी के बलिदान के कारण ही जम्मू कश्मीर से परमिट सिस्टम का अंत हुआ। उन्होंने डॉ. मुखर्जी को प्रखर राष्ट्रवादी नेता के साथ ही दूरद्रष्टा भी बताया। नड्डा ने कहा कि वह किसी पद से संबद्ध नहीं थे, वे सिर्फ देश की सेवा करने के लिए ही आगे बढ़े थे।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था। उनके पिता आशुतोष मुखर्जी शिक्षाविद् थे। वे मात्र 33 साल की उम्र में ही कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बन गए थे। 1939 में सक्रिय राजनीति में आ गए थे। 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी।

डॉ. मुखर्जी जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न हिस्सा बनाना चाहते थे। आजादी के समय जम्मू कश्मीर का अलग झंडा और संविधान था। डॉ. मुखर्जी ने इसका पुरजोर विरोध किया था। मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर से धारा-370 को खत्म करने की पुरजोर वकालत की थी।

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