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इन तीन राज्यों तक सीमित हुए अमित शाह, बीजेपी की बाकी रणनीति जेपी नड्डा और बीएल संतोष के हाथ

पिछले हफ्ते जब राज्यसभा में विपक्षी कांग्रेस के सांसदों ने हंगामा किया और कर्नाटक के मुद्दे पर कार्यवाही बाधित करनी चाही तब बीजेपी के कई बड़े नेताओं को अचानक जेपी नड्डा की सीट के पास पहुंचते और उन्हें घेरकर मंत्रणा करते हुए देखा गया।

Author नई दिल्ली | July 21, 2019 4:50 PM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा। (एक्सप्रेस फोटो)

बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने धीरे-धीरे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के पदचिह्नों पर चलते हुए पार्टी की कमान संभालनी शुरू कर दी है। वो संसद के अंदर और बाहर सियासी मोर्चों पर पार्टी के रणनीतिकारों के साथ संजीदगी से रणनीति बनाते हुए देखे गए। पिछले हफ्ते जब राज्यसभा में विपक्षी कांग्रेस के सांसदों ने हंगामा किया और कर्नाटक के मुद्दे पर कार्यवाही बाधित करनी चाही तब बीजेपी के कई बड़े नेताओं को अचानक जेपी नड्डा की सीट के पास पहुंचते और उन्हें घेरकर मंत्रणा करते हुए देखा गया।

सदन के बाहर भी बीजेपी के रणनीतिकारों भूपेंद्र यादव और अनिल जैन नड्डा के साथ उस कमरे में बैठे नजर आए, जिसमें कभी अरुण जेटली बैठा करते थे। फिलहाल वह कमरा राज्यसभा में नेता सदन थावरचंद गहलोत के नाम पर आवंटित है। उसी बड़े कमरे के एक कोने में नड्डा पार्टी सांसदों के साथ संसद के अंदर और बाहर की रणीति बनाते दिखे। पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद जेपी नड्डा को पहली बार बीजेपी संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी के बगल वाली दायीं सीट पर बैठे देखा गया, जबकि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह बायीं और और पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह उनसे दूर बैठे थे।

नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष बने हुए एक महीने से ज्यादा का वक्त हो गया है। इस बीच अमित शाह पार्टी अध्यक्ष बने हुए हैं। उन्होंने पार्टी के सभी नेताओं को भी स्पष्ट संदेश दे दिया है कि किसी भी मुद्दे के लिए नड्डा से ही मिलें। नड्डा से भी कहा गया है कि सिर्फ तीन राज्यों पश्चिम बंगाल, केरल और तेलंगाना से जुड़े मुद्दे पर फैसला लेने की प्रक्रिया में उन्हें (शाह को) शामिल करने करें। इस संकेत से पार्टी नेताओं का साफ मानना है कि नड्डा ही अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे।

हालांकि, शाह ने कुछ दिनों पहले ही महाराष्ट्र और यूपी में नए प्रदेश अध्यक्षों को नियुक्त किया है। चंद्रकांत दादा पाटिल को महाराष्ट्र और स्वतंत्रदेव सिंह को यूपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा शाह ने पार्टी के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बीएल संतोष को पार्टी का संगठन महासचिव बनाया है। उन्होंने रामलाल की जगह ली है, जो 13 साल से इस पद पर बने हुए थे। अमित शाह ने संतोष को नियुक्त कर सभी को चौंका दिया था क्योंकि माना जा रहा था कि रामलाल की जगह वी सतीश की नियुक्ति होगी लेकिन 62 साल के सतीश की जगह 56 साल के संतोष को तरजीह दी गई।

बीजेपी फिलहाल अमित शाह द्वारा खींची गई लकीर के सहारे ही आगे बढ़ रही है। उन्होंने पार्टी में 10 करोड़ नए सदस्य बनाने की मुहिम छेड़ी है। इसका जिम्मा भी एमपी के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान को सौंपा गया है। माना जा रहा है कि पार्टी मध्य प्रदेश में भी नेतृत्व के लिए नए चेहरे की तलाश में है लेकिन फिलहाल अभी तक किसी चेहरे पर मुहर नहीं लग सकी है। अमित शाह ने संगठनात्मक चुनाव की जिन्नेदारी भी राधामोहन सिंह को सौंपी है। माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में बीजेपी को नया अध्यक्ष भी मिल जाएगा।

मगर नए अध्यक्ष और संगठन महासचिव के सामने अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव में बड़ी चुनौती होगी। बता दें कि 2020 के शुरुआत में दिल्ली में जबकि अक्टूबर-नवंबर में बिहार में चुनाव होने हैं। बिहार में गठबंधन पर भी रह-रहकर संशय के बादल उमड़ रहे हैं क्योंकि सहयोगी जेडीयू मोदी मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हो सकी है। जम्मू-कश्मीर में भी चुनाव होनेवाले हैं, वहां फिलहाल राष्ट्रपति शासन चल रहा है। 2021 में पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव भी बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती होगी।

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