जम्मू-कश्मीर भाजपा इकाई ने शुक्रवार को कश्मीर में शराब बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों श्रीनगर के गुपकार रोड स्थित मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवास तक मार्च किया। घाटी में लंबे समय से शराब पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग उठती रही है, लेकिन 2024 में नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के सत्ता में आने के बाद पहली बार भाजपा ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।

हालांकि भाजपा की यह मांग केवल कश्मीर घाटी तक सीमित है, जम्मू क्षेत्र के लिए नहीं। इससे पहले 2018 में भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना ने भी केंद्र शासित प्रदेश में शराब बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी।

भाजपा के मीडिया प्रभारी साजिद यूसुफ शाह ने कहा, “पार्टी कश्मीर में शराब बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध की मांग कर रही है। यह मुद्दा घाटी के सामाजिक और धार्मिक मूल्यों से जुड़ा हुआ है। कश्मीर के लोग लगातार शराब बिक्री का विरोध करते रहे हैं। ऐसे में सरकार को जनता की भावना का सम्मान करते हुए पूरे क्षेत्र में शराब की दुकानों को बंद करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि पर्यटक कश्मीर में उसकी प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और मेहमाननवाजी के लिए आते हैं न कि शराब पीने के लिए।

बता दें कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रतिद्वंद्वी पीडीपी भी लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में शराबबंदी की मांग करती रही है। हाल ही में कश्मीर के प्रमुख धार्मिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि जब बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में शराबबंदी लागू हो सकती है तो मुस्लिम बहुल राज्य में ऐसा करना मुश्किल नहीं होना चाहिए।

वहीं, उमर अब्दुल्ला सरकार शराब सेवन को “व्यक्तिगत पसंद की स्वतंत्रता” से जोड़कर देख रही है। पिछले रविवार को मुख्यमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार ने कोई नई शराब दुकान नहीं खोली है और मौजूदा दुकानें निर्वाचित सरकार बनने से पहले से संचालित हो रही हैं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शराबबंदी को लेकर निजी विधेयक भी पेश किए जा चुके हैं।

हालांकि, इनमें से अब तक कोई पारित नहीं हुआ है। आमतौर पर जब आर्थिक पहलुओं पर चर्चा शुरू होती है तो यह मुद्दा धीमा पड़ जाता है।गौरतलब है कि कश्मीर में शराब की बिक्री और सेवन पर कभी औपचारिक प्रतिबंध नहीं रहा, लेकिन सार्वजनिक रूप से शराब पीना लंबे समय से सामाजिक रूप से वर्जित माना जाता है और यह कानूनन भी सीमित है।