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जनवरी में मिलेगा भाजपा को नया अध्यक्ष

भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव प्रभारी राधा मोहन सिंह के मुताबिक पार्टी के संगठनात्मक चुनाव के तहत बूथ स्तर का चुनाव 11 सितंबर से प्रारंभ हो गया है और यह 30 सितंबर तक पूरा होगा। इसके बाद 11-31 अक्तूबर तक मंडल स्तर के चुनाव होंगे। 11-30 नवंबर तक जिला स्तर के चुनाव और 1-15 दिसंबर तक राज्य स्तर के चुनाव होंगे।

Author नई दिल्ली | Updated: September 23, 2019 1:08 AM
अमित शाह (फोटो सोर्स – इंडियन एक्सप्रेस)

केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की कमान अगले साल जनवरी तक नए अध्यक्ष के हाथ में होगी। उम्मीद यही है कि फिलहाल कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में काम कर रहे जेपी नड्डा ही नए अध्यक्ष बनेंगे। ऐसी उम्मीद है कि भाजपा के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नड्डा को पूर्ण रूप से यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। अभी अमित शाह ही भाजपा के अध्यक्ष हैं। हालांकि भाजपा में एक व्यक्ति-एक पद की परंपरा रही है। अमित शाह के गृह मंत्री बन जाने के बाद उन्हें अध्यक्ष पद छोड़ देना चाहिए था। पर उन्होंने नड्डा को अभी कार्यकारी अध्यक्ष ही बनाया।

पार्टी के संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया में बूथ स्तर का चुनाव 11 सितंबर से शुरू हो गया है। मंडल, जिला और राज्यों के अध्यक्षों का चुनाव 15 दिसंबर तक पूरा किया जाना है। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया में करीब एक माह का समय लगेगा। ऐसे में पार्टी अध्यक्ष के नाम पर जनवरी तक मुहर लग जाएगी। अतीत में भाजपा में कार्यकारी अध्यक्ष की कोई परंपरा नहीं रही।

भाजपा के राष्ट्रीय चुनाव प्रभारी राधा मोहन सिंह के मुताबिक पार्टी के संगठनात्मक चुनाव के तहत बूथ स्तर का चुनाव 11 सितंबर से प्रारंभ हो गया है और यह 30 सितंबर तक पूरा होगा। इसके बाद 11-31 अक्तूबर तक मंडल स्तर के चुनाव होंगे। 11-30 नवंबर तक जिला स्तर के चुनाव और 1-15 दिसंबर तक राज्य स्तर के चुनाव होंगे। उनका कहना था कि 15 दिसंबर के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया शुरू होगी जब राज्यों के अध्यक्षों एवं राष्ट्रीय प्रतिनिधियों का चयन हो जाएगा। इसके बाद ही मतदाता सूची तैयार होगी।

महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में विधानसभा चुनाव के कारण संगठनात्मक चुनाव नहीं हो रहे हैं और पार्टी के संगठन से जुड़ी चुनावी प्रक्रिया में 33 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। भाजपा संविधान के मुताबिक 50 फीसद राज्यों का चुनाव संपन्न होने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव शुरू किया जा सकता है। अध्यक्ष का चुनाव एक निर्वाचक मंडल करता है। जिसमें जिला इकाइयों द्वारा निर्वाचित सदस्य, सभी विधायकों द्वारा अपने में से चुने गए 10 फीसद सदस्य, प्रदेश से राष्ट्रीय परिषद में उक्त राज्य में लोकसभा सदस्य के बराबर निर्वाचित सदस्य व पार्टी सांसदों द्वारा अपने में से चुने गए 10 फीसद सदस्य शामिल हैं।
अभी तक भाजपा में औपचारिक रूप से संगठन के चुनाव के लिए कभी मतदान की नौबत नहीं आई।

पार्टी का शिखर नेतृत्व पहले ही अध्यक्ष के बारे में तय कर लेता है। इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी कारगर होती है। उसके बाद राष्ट्रीय परिषद उसी नाम पर अपनी सहमति दे देती है। निर्वाचित होने के बाद अध्यक्ष अपनी टीम बनाता है। भाजपा ने संगठनात्मक चुनाव की दृष्टि से देशभर में 10,36,166 बूथ बनाए हैं जबकि पूरे देश में 1,979,94 शक्ति केंद्र हैं।

बताते चलें कि 2014 में जब अमित शाह भाजपा अध्यक्ष बने तब राजनाथ सिंह का दो साल का कार्यकाल बचा हुआ था। राजनाथ सिंह के केंद्रीय मंत्रिमंडल में चले जाने के बाद अगस्त 2014 में अमित शाह को अध्यक्ष बनाया गया था। अमित शाह जनवरी 2016 में भाजपा अध्यक्ष के रूप में फिर से निर्विरोध चुन लिए गए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी शीर्ष नेताओं ने अध्यक्ष पद के लिए शाह के नाम का प्रस्ताव किया था। नामांकन में किसी अन्य नेता का नाम आगे नहीं किया गया। शाह का चुनाव तीन वर्ष के पूर्ण कार्यकाल के लिए हुआ था।

अमित शाह का कार्यकाल जनवरी 2019 में पूरा हो गया था। इसके बाद शाह के कार्यकाल को लोकसभा चुनाव तक बढ़ा दिया गया था। लोकसभा चुनाव में शाह ने गांधीनगर से चुनाव में जीत हासिल की। उन्हें मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में गृह मंत्री बनाया गया। ऐसी स्थिति में पार्टी के वरिष्ठ नेता जेपी अध्यक्ष को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया।

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