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सीधी टक्कर की चुनौती के लिए खुद को करेगी तैयार बीजेपी

आम आदमी पार्टी (आप) ने इस पूरे चुनाव को बिजली-पानी और महिलाओं के मुफ्त सफर पर केंद्रित किया था। पार्टी सूत्र मानते हैं कि भाजपा के चुनाव में इसका कोई जिक्र नहीं था। इसके अतिरिक्त महिलाओं के लिए शुरू की गई मुफ्त बस सेवा भी भाजपा के लिए चुनाव परिणाम में नुकसान का सबसे बड़ा कारण बनी।

प्रतीकात्मक तस्वीर

विधानसभा चुनाव में बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब पांच साल में होने वाले चुनाव की रणनीति पर मंथन कर रही है। इस बार के चुनाव परिणाम में पार्टी को सबसे बड़ा नुकसान हर सीट पर हुई सीधी टक्कर से हुआ है। इसलिए भविष्य में होने वाले चुनाव के लिए भाजपा खुद को सीधी टक्कर के लिए तैयार करेगी। वहीं, इस चुनाव परिणाम पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी का कहना है कि मेरे कार्यकाल में कुल चार चुनाव लडेÞ गए। इनमें से 2017 व 2019 हम जीते। और अब 2020 में भी हमारा मत फीसद बढ़ा है।

आम आदमी पार्टी (आप) ने इस पूरे चुनाव को बिजली-पानी और महिलाओं के मुफ्त सफर पर केंद्रित किया था। पार्टी सूत्र मानते हैं कि भाजपा के चुनाव में इसका कोई जिक्र नहीं था। इसके अतिरिक्त महिलाओं के लिए शुरू की गई मुफ्त बस सेवा भी भाजपा के लिए चुनाव परिणाम में नुकसान का सबसे बड़ा कारण बनी।  महिलाओं व मुख्यतौर पर मुसलिम बहुल इलाकों में आम आदमी पार्टी को समर्थन दिया और एक बार फिर से आप पार्टी को बहुमत का आंकड़ा मिला।

ओखला, सीलमपुर जैसी सीटों का यह रुझान भाजपा नहीं समझ पाई। ऐसी करीब 17 सीट पर मतदान एकतरफा होने का असर देखा गया। इन सीटों में 6-7 प्रमुख ऐसी सीटें रही थीं, जिसमें 50 फीसद से अधिक मुसलिम बहुल क्षेत्र शामिल हैं। भाजपा सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के बड़े चेहरे इस बार फिर से दिल्ली चुनाव मैदान में थे। इन चेहरों की विश्वनीयता के आधार पर यह माना जा रहा था कि दिल्ली में कांग्रेस के प्रदर्शन में सुधार होगा।

ऐसे प्रमुख चेहरों वाली सीट में दिल्ली की करीब एक दर्जन सीट थी। जो इस चुनावी दंगल में भाजपा को फंसाने वाली सबसे बड़ी वजह बनी। आठ फीसद तक मत बैंक बढ़ने के बाद भी इन सीटों पर भाजपा का प्रदर्शन खराब रहा। संभावना जताई जा रही थी कि इन सीटों पर कांग्रेस का मत फीसद 10-12 तक रहेगा, लेकिन चुनाव परिणाम में यह मत फीसद केवल 4-5 फीसद पर ही आकर थम गया।

संकल्प पत्र में हुई देरी भी इस बार चुनाव में पार्टी के लिए नुकसान की वजह रही है। पार्टी सूत्र मानते हैं कि समय पर संकल्प पत्र आने की स्थिति में आम जनता को सभी तथ्यों को सही प्रकार से समझाया जा सकता था। संकल्प पत्र देरी से आने की वजह से पार्टी सभी मुद्दों को जनता के बीच नहीं ला पाई जबकि पार्टी ने जनता को लुभाने वाली कई घोषणाएं की थीं।

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