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तीन तरफ से घिरे सीएम त्रिवेंद्र रावत: बीजेपी सांसद ने कोर्ट में घसीटा, सर्वे में भी पिछड़े; जल्द कर सकते हैं कैबिनेट विस्तार

भारतीय जनता पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने हाल ही में उत्तराखंड हाईकोर्ट में चार धाम और 51 अन्य मंदिरों के संचालन के एक नए कानून का विरोध करते हुए एक जनहित याचिका दायर की है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत। (File Photo: PRAVEEN KHANNA)

कुछ दिनों पहले तक सियासी गलियारों में यह चर्चा चल रही थी कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की कुर्सी खतरे में है। इसके बाद रावत बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात करने दिल्ली पहुंचे। आलाकमान के साथ उनकी क्या बात हुई ये तो पता नहीं चल सका है लेकिन अब रावत के चेहरे से चिंता की लकीरें साफ हो गई है। हालांकि रावत अभी भी संकटों से घिरे हुए हैं। एक ओर जहां बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने उन्हें कोर्ट में घसीटा है तो दूसरी ओर सर्वे में भी पिछड़ गए हैं। हिंदुत्व के मुद्दे पर भी वे घेरे जा रहे हैं। दो साल बाद राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं। हालांकि फिलहाल वे कैबिनेट में विस्तार कर अपनी परेशानी थोड़ी कम कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें हरी झंडी भी मिल गई है।

इकोनॉमिक टाइम्स में छपे वरिष्ठ पत्रकार बुला देवी के आलेख के मुताबिक, “जनता की नजर में रावत की मुसीबतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने हाल ही में उत्तराखंड हाईकोर्ट में चार धाम और 51 अन्य मंदिरों के संचालन के एक नए कानून का विरोध करते हुए एक जनहित याचिका दायर की है। इसी बीच विहिप ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए प्रस्ताव दिया कि देवस्थानम बोर्ड को राम जन्मभूमि ट्रस्ट द्वारा स्थापित उदाहरण का पालन करना चाहिए। वीएचपी के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन नहीं चाहते कि ट्रस्ट पर और मंदिरों के प्रबंधन में कोई राजनीतिक हस्तक्षेप या सरकारी नियंत्रण हो।

राज्य में 2022 में होने वाले चुनाव से पहले एक टीवी न्यूज चैनल के हालिया सर्वेक्षण ने उन्हें खराब नंबर दिए। हालांकि संघ कैडर अब लोगों के मूड का जानने के लिए जमीन पर काम कर रहे हैं। यह काम अभी प्रक्रिया में है इसलिए रावत की लोकप्रियता कितनी घटी है या बढ़ी है, इस बात का पूरा पता नहीं चल पा रहा है।

पिछले महीने की शुरुआत में एक और घटना हुई थी। रावत ने अगले साल कुंभ मेले के आयोजन को लेकर हरिद्वार में संतों की एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में कोई भी संत नहीं आए। कई बार फोन किए गए लेकिन कोई नहीं पहुंचा। संतों ने अपने मोबाइल बंद कर दिए थे। आधा घंटा बीत गया था और मुख्यमंत्री अभी भी इंतजार कर रहे थे। वरिष्ठ अधिकारी यह बताने का साहस नहीं जुटा सके कि संत यहां नहीं आकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। अंत में एक अधिकारी जिनकी संतों के बीच अच्छी पकड़ है, उन्हें बैठक में भाग लेने के लिए संतों को मनाने के लिए रवाना किया गया। बैठक में संतों ने कुंभ मेले की धीमी तैयारियों को लेकर गुस्सा जाहिर किया। इसके बाद सीएम ने उनके सामने अधिकारियों को फटकार लगाई।

इस बीच पार्टी के भीतर असंतुष्ट नेताओं को साधने के लिए 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कुछ को कैबिनेट में जगह दी जा सकती है और कुछ को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती है। राज्य में मंत्रियों की कुल संख्या 12 हो सकती है, लेकिन 2017 से ही मंत्रिमंडल में सिर्फ 10 सदस्य हैं। उसमें से भी वित्त मंत्री प्रकाश पंत पिछले साल गुजर गए। पंत 2017 के चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी जता रहे थे लेकिन आलाकमान की कृपा से गद्दी रावत को मिली।

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