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असम में भाजपा सरकार का नया दांव, धार्मिक संस्थानों पर खर्च होंगे 710 करोड़ रुपए

धार्मिक संस्थानों या आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के स्थानों को 10 लाख रुपए तक दिए जाएंगे।

असम सरकार में मंत्री हिमंत बिस्व सरमा। (पीटीआई फोटो)

असम में भाजपा की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार ने 900 से अधिक धार्मिक संस्थानों को सड़क और बेहतर बुनियादी ढांचे से जोड़ने के लिए 710 करोड़ रुपए खर्च करने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। सरकार के इस कदम को प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों काउंटर करने की कोशिश की रूप में देखा जा रहा है। एशियन एज में छपी एक खबर के मुताबिक ‘असम दर्शन योजना’ के तहत सरकार इन स्थानों पर कनेक्टिविटी को बेहतर करेगी। करीब 915 धार्मिक स्थलों के बुनियादी ढांचे को उन्नत करने का काम किया जाएगा, जिसके तहत 710 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

इन धार्मिक संस्थानों या आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के स्थानों को 10 लाख रुपए तक दिए जाएंगे। जिनमें 459 मंदिर, 186 ‘सत्र’ (वैष्णव मठ), 123 नामघर (प्रार्थना और सामुदायिक हॉल), 47 मस्जिद और 27 चर्च शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले असम के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा था कि असम सरकार 63 राजकीय और सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों के नामों से ‘मकतब’ (इस्लामी धार्मिक अध्ययन केंद्र) शब्द को तत्काल प्रभाव से हटाएगी। सरकार का यह फैसला राज्य सरकार द्वारा संचालित मदरसों और संस्कृत विद्यालयों को उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में परिर्वितत करने के कदम के मद्देनजर आया है।

सरमा ने कहा कि हालांकि, स्कूलों के नामों से केवल ‘मकतब’ शब्द को हटाया जाएगा, जबकि नाम में लिखे बाकि शब्दों को वैसे ही रहने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे उन छात्रों के लिए समस्याएं पैदा हुई हैं, जो प्राथमिक विद्यालयों में अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उच्च विद्यालयों में प्रवेश चाहते हैं। राज्य के वित्त मंत्री ने कहा था, ‘ऐसे विद्यालयों के छात्रों से उच्च विद्यालयों में पढ़ाई करने की उनकी क्षमताओं के बारे में पूछताछ की जाती है, जहां कोई धार्मिक अध्ययन नहीं होता है।’

सरमा ने कहा कि मदरसों और संस्कृत विद्यालयों को पहले ही उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में परिर्वितत करने के सरकार के फैसले के बारे में सूचित कर दिया गया था और राज्य का बजट पेश होने के बाद शुरू होने वाली इसकी प्रक्रिया के अगस्त तक पूरा होने की उम्मीद है। (एजेंसी इनपुट)

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