लखीमपुर खीरी कांड: पार्टियों के लिए 50 सीटों का सवाल, अभी इनमें से 45 हैं बीजेपी के पास

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले लखीमपुर में हुई हिंसा ने भारतीय जनता पार्टी की चिंताओं को बढ़ा दिया है।

Lakhimpur Kheri Farmer Protest
लखीमपुर खीरी हिंसा के बाद विरोध प्रदर्शन करते किसान (AP Photo)

अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले लखीमपुर में हुई हिंसा ने भारतीय जनता पार्टी की चिंताओं को बढ़ा दिया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इस जिले की सभी आठ सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2012 के चुनावों में पार्टी के खाते में सिर्फ एक ही सीट आई थी। अब बीजेपी को डर है कि लखीमपुर में हुई हिंसा का असर आसपास के जिलों (पीलीभीत, शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर और बहराइच) में भी देखने को मिल सकता है। इन इलाकों में पिछले चुनावों में बीजेपी का दबदबा रहा था, अन्य राजनीतिक दलों की बढ़ती दिलचस्पी के पीछे भी इसे एक कारण माना जा रहा है।

लखीमपुर समेत आसपास के 7 जिलों में विधानसभा की कुल 50 सीटें हैं। मौजूदा स्थिति में इनमें से 45 पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। जबकि समाजवादी पार्टी के पास 4 विधायक हैं। एक विधायक बीएसपी का है। 2012 के विधानसभा चुनावों के नतीजे इसके बिल्कुल विपरीत थे। उस चुनाव में सपा को 25 सीटों पर और बसपा को 10 सीटों पर कामयाबी मिली थी। भारतीय जनता पार्टी 5 और कांग्रेस 2 पर ही सिमट गई थी।

लखीमपुर के जिस इलाके में रविवार को हिंसा की घटना हुई, वह निघासन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इस सीट पर 1993 से लेकर अब तक बीजेपी ने तीन बार जीत दर्ज की है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा इस सीट से 2007 में हार गए थे। हालांकि 2012 में जीतने में कामयाब रहे थे।

लखीमपुर खीरी में ब्राह्मणों का वर्चस्व रहा है। इसके बाद ओबीसी में गैर-यादवों का दबदबा रहा है। मुस्लिम और कुर्मी आबादी भी प्रमुख है। आबादी का 80 फीसदी हिस्सा ग्रामीण है, जो गन्ने की खेती पर निर्भर है। बेहद उपजाऊ मानी जाने वाली इस जमीन पर कई समृद्ध सिख किसान परिवारों का भी दबदबा रहा है।

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।