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पानी में तैरेंगे बत्तख तो बढ़ेगा ऑक्सीजन: बिप्लब देब के समर्थन में बीजेपी, बोली- वैज्ञानिक प्रमाण है

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देब के 'बत्तख से ऑक्सीजन' वाले बयान का भाजपा ने समर्थन किया है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि काफी समय पहले भारत में बत्तखों का उपयोग मछली पालन में होता था। यह भारतीय पारंपरिक ज्ञान है, बाद में इसकी पुष्टि वेस्टर्न वैज्ञानिकों ने भी की।

Author August 29, 2018 3:53 PM
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देब (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

देबराज देब 

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देब के बयान ‘पानी में तैरेंगे बत्तख तो बढ़ेगा ऑक्सीजन’ के एक दिन बाद भाजपा ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इंडियन एक्सप्रेस डॉट कॉम से बात करते हुए भाजपा प्रवक्ता डॉ. अशोक सिन्हा ने कहा कि, “मुख्यमंत्री का बयान 100 प्रतिशत सही है।” साथ ही उन्होंने दावा किया कि इसका वैज्ञानिक प्रमाण भी है। उन्होंने कहा, “काफी समय पहले भारत में बत्तखों का उपयोग मछली पालन में होता था। यह भारतीय पारंपरिक ज्ञान है, बाद में इसकी पुष्टि वेस्टर्न वैज्ञानिकों ने भी की।”

त्रिपुरा स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सेवानिवृत्त प्रिंसिपल व वैज्ञानिक अधिकारी और त्रिपुरा विज्ञान मंच के संयुक्त संयोजक डॉ. मिहिर लाल रॉय ने बिप्लव देव के बयान पर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। कहा था कि, “मुख्यमंत्री का यह बयान कि बत्तख के पानी में तैरने से ऑक्सीजन लेवल बढ़ता है, बेवजह की बात है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।” सिन्हा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “रॉय का बयान राजनीति से प्रेरित था। पूर्व अधिकारी ने बिना वैज्ञानिक प्रमाण मुख्यमंत्री के बयान की आलोचना करने की कोशिश की। खाद्य और कृषि संगठन ने भी अपने शोध में कहा है कि तैराकी करते समय बतख पानी में हवा मिला देते हैं, यही कारण है कि उन्हें जैविक वायुयान भी कहा जाता है। साथ ही कई अन्य प्रसिद्ध शोध भी उपलब्ध हैं, जो इस बात का दावा करते हैं।”

 

राज्य सरकार भी बिप्लव देब के बचाव में सामने आयी है। सोमवार को बत्तख पालन पर दिए अपने सुझावों को वैज्ञानिक ज्ञान पर सही ठहराने की कोशिश की। राज्य के मत्सय सचिव रामेश्वर दास ने मीडिया से कहा कि, “बतख और मछली के एक साथ पालने को एकीकृत मछली पालन कहा जाता है। हम इस प्रक्रिया में बत्तख या अन्य पशुओं के साथ मछली पालन कर सकते हैं। हम इस तकनीक को राज्य में आगे बढ़ाना पसंद करेंगे।” त्रिपुरा कॉलेज ऑफ फिशरीज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मृणाल कांति दत्त ने कहा कि, “मुख्यमंत्री द्वारा 50 हजार बत्तख पालन का प्रस्ताव किसानों और मछली पालकों के लिए काफी फायदेमंद होगा। चीन, ताईवान सहित अन्य देशों में भी ऐसा किया जाता है।”

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