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मैंने G7 में पीएम के भाषण पर सवाल क्या पूछा सारे अंध और गंधभक्त डर गए- बीजेपी सांसद ने किया ट्वीट

स्वामी ने पीएम द्वारा जी-7 शिखर सम्मेलन में दिये गए भाषण को लेकर एक सवाल पूछा। जिसके बाद उन्हे सोशल मीडिया में मोदी समर्थक ट्रोल करने लगे। ट्रोल किए जाने पर स्वामी ने लिखा कि उन्होंने तो सिर्फ सवाल किया था लेकिन ये सारे अंध और गंधभक्त डर गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी। (express file)

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के कटु आलोचक हैं। रविवार को स्वामी ने पीएम द्वारा जी-7 शिखर सम्मेलन में दिये गए भाषण को लेकर एक सवाल पूछा। जिसके बाद उन्हे सोशल मीडिया में मोदी समर्थक ट्रोल करने लगे।

मोदी समर्थकों द्वारा ट्रोल किए जाने पर स्वामी ने लिखा कि उन्होंने तो सिर्फ सवाल किया था लेकिन ये सारे अंध और गंधभक्त डर गए। भाजपा सांसद ने लिखा “मैंने ट्विटर पर एक साधारण सा सवाल किया था कि ‘क्या मोदी ने जी 7 में अपना भाषण दिया और क्या किसी के पास एक प्रति है जिसे मैं पढ़ना चाहूंगा। मुझे लगता है कि भारत के अलावा, अन्य आमंत्रित लोग ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण कोरिया थे जिन्होंने भी बात की थी।’ इससे अंधभक्त और गांधीभक्त इतने भयभीत क्यों हैं।”

उनके इस ट्वीट पर कुछ यूजर्स ने भी अपनी प्रतिकृया दी है। एक ने लिखा “ये सब छोड़िए सर सुशांत को जस्टिस दिलाये, आज उनमी मौत को एक साल हो गया है।” शुभम त्यागी नाम के यूजर ने लिखा “स्वामी जी राजनीतिक शब्दो का उलटफेर ठीक है लेकिन भक्त शब्द को राजनीतिक रंग देना अत्यंत ओछी राजनीति है। आपसे ऐसी उम्मीद नही थी। याद रखिऐ जब राजनीति धर्मनीति का अपमान करती है तो राजनीति का ही अंत होता है।”

बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि तानाशाही, आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद, झूठी सूचनाओं और आर्थिक जोर-जबरदस्ती से उत्पन्न विभिन्न खतरों से साझा मूल्यों की रक्षा करने में भारत जी-7 का एक स्वाभाविक साझेदार है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, जी-7 शिखर सम्मेलन के ‘मुक्त समाज एवं मुक्त अर्थव्यवस्थाएं’ सत्र में मोदी ने अपने डिजिटल संबोधन में लोकतंत्र, वैचारिक स्वतंत्रता और स्वाधीनता के प्रति भारत की सभ्यतागत प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

मोदी ने आधार, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) और जेएएम (जन धन-आधार-मोबाइल) तीनों के माध्यम से भारत में सामाजिक समावेश और सशक्तीकरण पर डिजिटल प्रौद्योगिकियों के क्रांतिकारी प्रभाव को भी रेखांकित किया।

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