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BJP ने पूरे मुल्क में छिड़का मिट्टी का तेल, एक चिंगारी से बढ़ सकती है मुसीबत- लंदन में बोले राहुल, नकवी ने कहा- ये सामंती सुरूर में चकनाचूर

राहुल गांधी के बयान पर केन्द्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने कहा कि ऐसा बयान आपराधिक साजिश के तहत ही दिया जा सकता है।

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राहुल गांधी (फोटो सोर्स: @rahulgandhi)

कांग्रेस नेता और सांसद राहुल गांधी इन दिनों लन्दन में हैं और उन्होंने एक कांफ्रेंस में हिस्सा लिया। इस दौरान राहुल गांधी ने बीजेपी पर निशाना साधा और कहा कि बीजेपी ने पूरे मुल्क में मिट्टी का तेल छिड़क दिया है और सिर्फ एक चिंगारी से मुसीबत बढ़ सकती है। वहीं मुख़्तार अब्बास नकवी ने राहुल गांधी के बयान को आपराधिक साजिश बताते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा है।

दरअसल एक कांफ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने कहा, “भारत अच्छी स्थिति में नहीं है। बीजेपी ने पूरे देश में मिट्टी का तेल फैला दिया है। आपको एक चिंगारी चाहिए और हम बड़ी मुसीबत में पड़ जाएंगे। मुझे लगता है कि यह विपक्ष की भी जिम्मेदारी है, खासकर कांग्रेस की जो लोगों, समुदायों, राज्यों और धर्मों को एक साथ लाती है। हमें इस तापमान को कम करने की जरूरत है क्योंकि अगर यह तापमान ठंडा नहीं हुआ तो चीजें गलत हो सकती हैं।”

वहीं रोजगार को लेकर राहुल गांधी ने कहा, “उत्पादन प्रणाली के निर्माण के बिना भारत अपने लोगों को रोजगार नहीं दे पायेगा। यह बहुत ही सरल है। हमें इस विचार से आगे बढ़ने की जरूरत है कि विकास महत्वपूर्ण हैं। बल्कि विकास जरूरी है और उत्पादन और विनिर्माण भी महत्वपूर्ण है।”

बीजेपी ने प्रेस कांफ्रेंस कर राहुल गांधी के बयान की निंदा की। बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा, “राहुल गांधी देश का अपमान क्यों कर रहे हैं? मिट्टी का तेल तो कांग्रेस पार्टी छिड़कती है। 1984 के कत्लेआम में मिट्टी का तेल छिड़कने वाले कांग्रेस पार्टी के ही नेता था। कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी के हैंडल से एक ट्वीट हुआ जिसमे राजीव गांधी के बयान का उल्लेख किया गया कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। राहुल जी को पढ़ने-लिखने में ज्यादा रुचि नहीं है।”

वहीं राहुल के बयान पर केन्द्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नकवी ने एक निजी समाचार चैनल से बात करते हुए कहा, “हर हिंदुस्तानी देश की खुशहाली की दुआ करता है। लेकिन ये जो सामंती लोग हैं, विदेश में बैठकर हिंदुस्तान की बदहाली की बद्दुआ करते हैं। अफसोस इनको निराशा ही हाथ लगती है। दिक्कत ये है कि सामंती सुरूर में जो चकनाचूर लोग हैं उन्हें आज ये समझ में नहीं आता है कि बिना जमीन के जमीदारी खत्म हो चुकी है। बिना जनाधार के जागीरदारी का युग खत्म हो चुका है।”

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