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बोलीं बीजेपी प्रवक्ता- सलाख़ों के पीछे होंगे राकेश टिकैत जैसे लोग, जदयू नेता ने कहा- सरकार को MSP पर कानून बनाना चाहिए

जनता दल नेता केसी त्यागी ने कहा, "हमारी लड़ाई खाली एमएसपी की नहीं है, हम तो पूरा सिस्टम बदलना चाहते हैं। दाम कौन तय करेगा, दाम कैसे तय करेंगे?

farmer movementजनता दल (यू) नेता केसी त्यागी और भाजपा प्रवक्ता संजू वर्मा (फोटो-सोशल मीडिया)

पिछले सत्तर दिन से चल रहा किसानों का आंदोलन अब दिल्ली के साथ ही देश के बाहर भी चर्चा का विषय बन चुका है। इसको लेकर टीवी चैनलों के डिबेट में नेताओं और राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं के बीच बहस भी तेज हो गई है। गुरुवार को न्यूज 24 पर इसको लेकर एंकर मानक गुप्ता ने बीजेपी की प्रवक्ता संजू वर्मा से जब कहा, “सब कह रहे हैं कि 70 दिन कोई आंदोलन चलेगा तो विपक्ष तो सड़कों पर उतरेगा ही। संसद में भी मुद्दा उठाएगा, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोगों को बोलने का मौका मिलेगा तो जिम्मेदारी आपकी है। जिम्मेदारी लीजिए।”

इस पर भाजपा की प्रवक्ता संजू वर्मा ने कहा, “मानक जी आपने सही कहा, दिल्ली पुलिस कुछ भी करती है तो इसकी जिम्मेदारी सेंट्रल होम मिनिस्ट्री की है। आप हमें यह बताइए कि जांच एजेंसी पर उंगली उठाना, लांछन लगाना और इन्वेस्टीगेटिव एजेंसी को सेकंड गेस करना कहां की पोलिटिकल मैच्योरिटी है?”

उन्होंने कहा, “70 दिन हो या 80 दिन, मोदी सरकार ने दिखाया कि शाहीन बाग के बाद भी डोंट टेस्ट द माइट ऑफ स्टेट। ताहिर हुसैन आज जेल में है, उमर खालिद जेल में हैं, शरजील इमाम जेल में हैं तो मैं आपको यह भी बता दूं कि राकेश टिकैत जैसे लोग भी बहुत जल्दी सलाखों के पीछे होंगे। आप चिंता न करिए, टिकैत, सतनाम पन्नू, दर्शन पाल, बलदेव सिंह धारीवाल जैसे लोग जो भड़काऊ भाषण देते हैं। ये सब भी जेल जाएंगे।”

उधर, आज तक न्यूज चैनल पर एंकर अंजना ओम कश्यप के सवाल पर बोलते हुए जनता दल यू के महासचिव केसी त्यागी ने कहा, “ये कोई दो चार साल की लड़ाई नहीं है। ये सदियों से गांव, किसान और खेती की लड़ाई है। 1952 में जब प्रथम पंचवर्षीय योजना बनी थी, तब से चल रहा है।” कहा, “पंडित नेहरू का 1964 में पार्लियामेंट में बयान है कि हमने कृषि की उपेक्षा की, इसकी वजह से गांव पिछड़ गए, खेती पिछड़ गई, किसान पिछड़ गए।”

उन्होंने कहा, “उसके बाद हमारी लड़ाई खाली एमएसपी की नहीं है, हम तो पूरा सिस्टम बदलना चाहते हैं। दाम कौन तय करेगा, दाम कैसे तय करेंगे? अब कार बनाने वालों का कहना है कि हम कार का दाम बढ़ाएंगे 50 हजार रुपये, क्योंकि जो रॉ मटेरियल है, स्टील है उसके दाम बढ़ गए हैं।”

कहा कि “हमारी भी मिट्टी के दाम बढ़ गए, पेस्टीसाइट्स के दाम बढ़ गए, इंसेक्टीसाइट्स के दाम बढ़ गए और पेट्रोल-डीजल अपने अंतरराष्ट्रीय सत्तर साल के रिकॉर्ड पर है तो हमारा कास्ट ऑफ प्रोडक्शन का दाम कौन तय करेगा?”

बोले कि “बाकी चीजों के लिए तो कानून है कि उद्योगों के दाम तो उसके मालिक तय करते हैं एमआरपी लिखकर, लेकिन हमारी एमएसपी जो प्रधानमंत्री और हमारी संसद तय करती है, वह अधिकार हमें क्यों नहीं मिलता है? जब आपकी एमआरपी के लिए कानून बना है तो हमारी एमएसपी के लिए कानून क्यों नहीं है? और मैं उस प्रोपेगैंडे का हिस्सा नहीं हूं कि एमएसपी खत्म हो जाएगी। एमएसपी थी, एमएसपी है और एमएसपी रहेगी। लेकिन सरकार के द्वारा जो घोषित एमएसपी है, वह सरकारी खरीद के लिए, उसके अलावा किसानों की भी एमएसपी होनी चाहिए, जो किसान तय करें।”

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