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कांग्रेस का रवैया नकारात्मक, अवरोधक और विकास विरोधी: भाजपा

अपने 25 सांसदों को लोकसभा की पांच दिन की कार्यवाही से निलंबित किए जाने का कांग्रेस द्वारा विरोध करने के बीच भाजपा संसदीय दल ने मुख्य विपक्षी दल पर..

भाजपा संसदीय समिति की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडु और भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी। (पीटीआई फोटो)

अपने 25 सांसदों को लोकसभा की पांच दिन की कार्यवाही से निलंबित किए जाने का कांग्रेस द्वारा विरोध करने के बीच भाजपा संसदीय दल ने मुख्य विपक्षी दल पर नकारात्मक, अवरोधक और विकास विरोधी होने का आरोप लगाते हुए उसके खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है। उसने कहा कि कांग्रेस का रवैया भारत के दुनिया की महत्वपूर्ण ताकत बनने के प्रयासों में बाधक साबित होगा।

संसद भवन परिसर में जहां सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने अपने 25 सांसदों को निलंबित किए जाने के विरोध में धरना दिया, वहीं नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भाजपा संसदीय दल की बैठक में सत्तारूढ पार्टी ने निलंबन को लोकतंत्र के लिए काला दिन बताने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधा। भाजपा ने कांग्रेस को पूर्व में उसके शासनकाल में आपातकाल लगाए जाने की याद दिलाते हुए उसकी आलोचना की।

कांग्रेस द्वारा सुषमा स्वराज, वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की मांग से पीछे नहीं हटने की प्रतिबद्धता जताए जाने के बीच भाजपा ने कहा कि इस मांग का कोई आधार नहीं है और संसदीय दल अपने नेताओं के साथ खड़ा है। बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि कांग्रेस ने एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाने की जिम्मेदारी को त्याग दिया है और संसद, विशेष तौर पर राज्यसभा में अपने संख्या बल का इस्तेमाल कर रही है।

इसमें कहा गया है कि भाजपा संसदीय दल, कांग्रेस के नकारात्मक, अवरोधक और विकास विरोधी संकीर्ण सोच की निंदा करती है क्योंकि इसका दीर्घावधि में देश पर गंभीर और प्रतिकूल प्रभाव पडेÞगा जो दुनिया में एक महत्वपूर्ण आर्थिक ताकत के रूप में उभर रहा है। बैठक के बाद संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने संवाददाताओं से कहा कि कांग्रेस विध्वंसक विपक्षी पार्टी बन गई है।

भाजपा संसदीय दल की बैठक में कहा गया कि सरकार ने मानसून सत्र में सदन को सुचारू रूप से चलाने का प्रयास किया, साथ ही कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया गया कि मुख्य विपक्षी पार्टी प्रारंभ में व्यापमं और ललित मोदी प्रकरण पर चर्चा करने के लिए तैयार थी लेकिन उसने बाद में यूटर्न ले लिया। बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि कांग्रेस ने इस बारे में वित्त मंत्री और राज्य सभा में सदन के नेता अरुण जेटली द्वारा बुलायी गई बैठक में हिस्सा लेने से इंकार कर दिया और 31 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाने के सरकार के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया। इसमें विपक्षी दल पर संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे के तहत काम करने का आरोप लगाया गया।

भाजपा के प्रस्ताव में कांग्रेस पर आरोप लगाया गया है कि वह जानबूझकर देश को आगे बढ़ाने के मोदी सरकार के प्रयासों को बाधित करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस संसद के पिछले सत्रों के दौरान कामकाज की बेहतर स्थिति से स्तब्ध रह गई। स्तब्ध कांग्रेस ने इसके बाद अर्थव्यवस्था को बहाल करने के उद्देश्य से आगे बढ़ाए जा रहे जरूरी आर्थिक सुधारों और सरकार की कल्याण एवं विकास नीतियों का मार्ग को रोकने की नीति तैयार की। यह उसकी राजनीतिक रणनीति बन गई है जिस पर कांग्रेस ने मॉनसून सत्र में पूरी ताकत से अमल किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता कांग्रेस के आंखों का कांटा बन गई है।

भाजपा संसदीय दल की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि 130 वर्षो के इतिहास वाली पार्टी, जिसने देश पर पांच दशकों तक शासन किया, वह 2014 के चुनाव में मिली हार से उबर नहीं पायी। वह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को लोगों द्वारा दिए गए स्पष्ट बहुमत को पचा नहीं पाई। सुषमा, राजे और शिवराज के इस्तीफे की कांग्रेस की मांग पर प्रस्ताव में कहा गया है कि इसका कोई आधार नहीं है।

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह प्रस्ताव पेश किया जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। इसमें कहा गया कि राजे और चौहान के इस्तीफे की मांग का कोई आधार नहीं है और भाजपा संसदीय दल उनके साथ खड़ी है। प्रस्ताव में कांग्रेस के 25 सदस्यों को निलंबित करने के स्पीकर सुमित्रा महाजन के फैसले का बचाव करते हुए कहा गया कि आसन के प्रति असम्मान प्रकट करने और तख्तियां नहीं दिखाने के उनके आग्रह को अनसुना करने के बाद विकट स्थिति में ऐसा करना पड़ा।

इसमें कहा गया कि भाजपा संसदीय दल आश्चर्यचकित है कि सोनिया गांधी ने इसे लोकतंत्र का काला दिन बताया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस पार्टी जिसने 1975 में देश में आपातकाल लगाने और जनता से उसके स्वतंत्रता का अधिकार छीना, वह ऐसे गलत दावे कर रही है। इसमें 15 मार्च 1989 को इंदिरा गांधी की हत्या पर न्यायमूर्ति ठक्कर आयोग की रिपोर्ट सदन में पेश किए जाने की मांग करने के दौरान विपक्ष के 63 सदस्यों को निलंबित करने का भी जिक्र किया गया।

भाजपा संसदीय दल ने बैठक में एक अन्य प्रस्ताव पारित किया जिसमें ऐतिहासिक नगा शांति समझौते की सराहना की गई। इसमें कहा गया है कि इसकी लंबे समय से प्रतीक्षा की जा रही थी और इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का माहौल बन सकेगा।

इसमें पिछली सरकारों के लगातार प्रयासों का संज्ञान लिया गया है जिसकी परिणति वर्तमान रूप में सामने आई है। नकवी ने बताया कि समझौते के बारे में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जानकारी दी और केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसका प्रस्ताव किया।

बैठक के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी जैसे कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों के बारे में बताया जबकि संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कांग्रेस की नकारात्मक नीति का जिक्र किया। नकवी ने कहा कि कांग्रेस जनादेश का अपमान कर रही है और मोदी सरकार इससे अप्रभावित रहते हुए विकास के लिए काम करना जारी रखेगी।

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